TRAI: भारत में सस्ता नहीं होगा सैटेलाइट इंटरनेट, कंपनियों से वसूला जाएगा 4% स्पेक्ट्रम शुल्क
TRAI ने सरकार से सिफारिश की है कि उपग्रह इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से उनके वार्षिक सकल राजस्व (AGR) का 4% हिस्सा बतौर स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क वसूला जाए। यह शुल्क उन कंपनियों पर लागू होगा जो भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करती हैं, जैसे कि Starlink, OneWeb, Amazon’s Project Kuiper आदि।

विस्तार
दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने भारत में उपग्रह (सैटेलाइट) इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों जैसे एलन मस्क की Starlink के लिए नए शुल्क और लाइसेंस नियमों की सिफारिश की है। TRAI के ये सुझाव भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार को एक नई दिशा दे सकते हैं, लेकिन साथ ही कंपनियों की लागत में भी वृद्धि करेंगे।
4% वार्षिक राजस्व पर स्पेक्ट्रम शुल्क
TRAI ने सरकार से सिफारिश की है कि उपग्रह इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से उनके वार्षिक सकल राजस्व (AGR) का 4% हिस्सा बतौर स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क वसूला जाए। यह शुल्क उन कंपनियों पर लागू होगा जो भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करती हैं, जैसे कि Starlink, OneWeb, Amazon’s Project Kuiper आदि।
शहरी ग्राहकों पर 500 रुपये वार्षिक अतिरिक्त शुल्क
इसके अलावा, TRAI ने यह भी सिफारिश की है कि जो सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियां शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देंगी, उनसे हर ग्राहक के लिए 500 रुपये सालाना अतिरिक्त शुल्क लिया जाए। यह शुल्क संभवतः डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में सेवाएं सस्ती रखने के मकसद से सुझाया गया है।
लाइसेंस की वैधता 5 वर्ष, 2 वर्ष का विस्तार संभव
TRAI ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम लाइसेंस की वैधता अवधि को 5 वर्ष तय करने की सिफारिश की है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर 2 वर्षों तक और बढ़ाया जा सकेगा। यह लाइसेंस प्रणाली कंपनियों को दीर्घकालिक योजना बनाने और निवेश के लिए स्पष्टता प्रदान करेगी।