AI बनाम इंसान: नई कोडिंग समस्या को दूर नहीं कर पाया ChatGPT, इंसानों को रिप्लेस करना नामुमकिन

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Mon, 08 Jul 2024 05:05 PM IST
सार

एआई की सफलता न्यूनतम 0.66 प्रतिशत से लेकर 89 प्रतिशत तक थी। यह रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि चैटजीपीटी कभी-कभी मानव प्रोग्रामर की बराबरी कर सकता है या उससे भी आगे निकल सकता है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।

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Study shows ChatGPT fails to solve newer coding problems
AI - फोटो : microsoft

    विस्तार

    साल 2022 में ChatGPT को लॉन्च किया गया था। ChatGPT एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर आधारित एआई टूल है जो इंसानों के सवालों के जवाब इंसानों की तरह देने में सक्षम है। ChatGPT को लेकर कहा गया कि यह इंसानों की जरूरत को खत्म कर देगा। लोगों की नौकरियां छीन लेगा। ChatGPT को लेकर यह भी कहा गया कि यह किसी भी तरह का कोड लिख सकता है। ऐसे में भविष्य में डेवलपर्स की जरूरत नहीं होगी, लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने इस कयास को खत्म कर दिया है।

    सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पर आईईईई ट्रांजेक्शन के जून अंक में प्रकाशित शोध में कार्यक्षमता, जटिलता और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए चैटजीपीटी द्वारा निर्मित कोड की तुलना एक प्रोग्रामर द्वारा लिखे गए कोड से की गई। अध्ययन में पाया गया कि क्रिएटिव कोड तैयार करने में चैटजीपीटी की सफलता दर व्यापक रूप से भिन्न है।

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    कार्य की कठिनाई, प्रयुक्त प्रोग्रामिंग भाषा और अन्य कारकों के आधार पर, एआई की सफलता न्यूनतम 0.66 प्रतिशत से लेकर 89 प्रतिशत तक थी। यह रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि चैटजीपीटी कभी-कभी मानव प्रोग्रामर की बराबरी कर सकता है या उससे भी आगे निकल सकता है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।

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