'AI अब तक का सबसे बड़ा बुलबुला': Zoho के श्रीधर वेम्बु ने बिग-टेक कंपनियों की रणनीति पर उठाए सवाल
AI Bubble:
जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने AI इंडस्ट्री में चल रहे भारी निवेश और बढ़ती होड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा AI दौर शायद अब तक का सबसे बड़ा टेक बबल साबित हो सकता है। वेम्बु ने यह भी बताया कि इस समय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है।

विस्तार
Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अपने बेबाक विचारों की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने AI सेक्टर में हो रहे भारी निवेश और बड़ी टेक कंपनियों की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
वेम्बु का कहना है कि मौजूदा AI दौर शायद टेक इंडस्ट्री का “अब तक का सबसे बड़ा बुलबुला” बन सकता है। उन्होंने कहा कि हर बड़ी टेक्नोलॉजी वेव के दौरान इस तरह का माहौल बनता है, लेकिन इस बार स्थिति पहले से कहीं ज्यादा बड़ी नजर आ रही है।सबसे बड़ी चुनौती नुकसान से बचनावेम्बु ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि AI कितना बड़ा बनेगा, बल्कि यह है कि कंपनियां इस दौर से बिना ज्यादा नुकसान उठाए कैसे निकलेंगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI सेक्टर में अरबों डॉलर झोंक रही हैं। दूसरी तरफ, लागत कम करने और AI आधारित ऑटोमेशन बढ़ाने के चलते टेक इंडस्ट्री में लगातार छंटनी भी देखने को मिल रही है।
सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में कही यह बात
श्रीधर वेम्बु ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट के जवाब में की।यह पोस्ट “बुल थियरी” नाम के अकाउंट से शेयर किया गया था।उस पोस्ट में दावा किया गया था कि AI इंडस्ट्री की मौजूदा तेज ग्रोथ वास्तविक मांग से ज्यादा निवेश और अकाउंटिंग मॉडल पर आधारित हो सकती है।पोस्ट के मुताबिक, OpenAI, Anthropic, Microsoft, Google, Amazon और Oracle जैसी कंपनियां AI पर जो भारी निवेश कर रही हैं, उसका बड़ा हिस्सा भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
अकाउंटिंग का खेल है एआई कंपनियों की ग्रोथ?
पोस्ट में दावा किया गया है कि बड़ी टेक कंपनियां AI स्टार्टअप्स को भारी आर्थिक मदद देती हैं। बदले में वही स्टार्टअप्स अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इन कंपनियों के क्लाउड सर्वर को किराए पर लेने में खर्च कर देते हैं।
उदाहरण के तौर पर पोस्ट में कहा गया कि Microsoft ने OpenAI में करीब 13 अरब डॉलर का निवेश किया था। इसमें क्लाउड क्रेडिट्स भी शामिल थे।OpenAI ने इन क्रेडिट्स का इस्तेमाल अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने में किया और Microsoft ने उसी खर्च को क्लाउड रेवेन्यू के रूप में दर्ज कर लिया।OpenAI का सालाना क्लाउड खर्च 60 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच चुका है, जबकि उसका वास्तविक रेवेन्यू लगभग 25 अरब डॉलर बताया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
AI से कोड लिखवाने पर भी उठा चुके हैं सवाल
श्रीधर वेम्बु पहले भी AI को लेकर कई बार अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। खासतौर पर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर उन्होंने सवाल उठाए थे।कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि AI से कोड लिखवाने के बावजूद सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की प्रोडक्टिविटी में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं दिख रही है।
यह बयान ऐसे समय आया था जब एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां अपने इंजीनियरों से बड़े स्तर पर AI जनरेटेड कोड का इस्तेमाल करवा रही हैं। कई AI कंपनियों में अब ज्यादातर कोडिंग AI टूल के जरिए ही की जा रही है।
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