AI: एआई और डेटा सेंटर से भारत में आने वाला है नया टेक बूम, लाखों नौकरियों के खुल सकते हैं रास्ते

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Mon, 25 May 2026 11:26 AM IST
सार

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भारत में एक नए तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर की लहर चल पड़ी है। अब सिर्फ हाईवे या एयरपोर्ट ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं। सरकार की 'डेटा लोकलाइजेशन' नीति और तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मांग इस सेक्टर में भारी निवेश आकर्षित कर रही है। इससे 1990 के दशक जैसी एक नई तकनीकी और रोजगार क्रांति की उम्मीद जग गई है।

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डेटा सेंटर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एआई जनरेटेड

    आज के भारत में एक नया इंफ्रास्ट्रक्चर बूम देखने को मिल रहा है। यह बूम सड़कों या कारखानों का नहीं, बल्कि विशालकाय इमारतों का है। इन इमारतों में अनगिनत सर्वर्स, कूलिंग सिस्टम, फाइबर केबल और शक्तिशाली जीपीयू (GPU) लगे होते हैं, जो हमारी डिजिटल दुनिया को चलाते हैं।

    कुछ साल पहले तक, ज्यादातर भारतीय कंपनियां अपने ऑफिस के एक छोटे से कमरे में सर्वर रखती थीं। लेकिन अब, भारत में डेटा सेंटर्स की मांग आसमान छू रही है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अनुसार, साल 2020 में भारत की डेटा सेंटर क्षमता सिर्फ 375 मेगावाट थी, जो 2025 में बढ़कर 1,500 मेगावाट से अधिक हो गई है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2031 तक यह क्षमता लगभग छह गुना बढ़कर 10.5 गीगावाट तक पहुंच सकती है।

    गूगल डेटा सेंटर (साकेंतिक)
    गूगल डेटा सेंटर (साकेंतिक) - फोटो : एआई जनरेटेड

    डेटा सेंटर में आखिर इतनी तेजी क्यों?

    इस तेजी के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला कारण है भारत सरकार की 'डेटा लोकलाइजेशन' की नीति। सरकार चाहती है कि भारतीय यूजर्स का डेटा विदेशों में जाने के बजाय भारत की सीमा के भीतर ही सुरक्षित रहे। इसके लिए सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट लागू किया है और आरबीआई जैसी संस्थाओं ने कड़े नियम बनाए हैं।

    दूसरा बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल। एआई सिस्टम को चलाने के लिए भारी भरकम कंप्यूटिंग पावर, खास चिप्स और बेहतरीन कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है। पहले क्लाउड और अब एआई ने हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की जरूरत को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, भारतीय भाषाओं में एआई मॉडल बनाने के लिए भी विशाल लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए।

    गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन भी बढ़ा रहे निवेश

    सरकार की इन कोशिशों को प्राइवेट कंपनियों का भी पूरा साथ मिल रहा है। इंडिया एआई समिट में अदानी ग्रुप ने 2035 तक 100 अरब डॉलर के निवेश से रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले एआई-रेडी डेटा सेंटर बनाने का एलान किया। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 120 अरब डॉलर के भारी निवेश की घोषणा की है।

    वैश्विक कंपनियां भी भारत को एक रणनीतिक डेटा सेंटर, एआई और क्लाउड हब के रूप में देख रही हैं। गूगल ने हाल ही में विशाखापट्टनम के पास भारत का सबसे बड़ा एआई हब बनाने की शुरुआत की है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) भी अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।

    माइक्रोसॉफ्ट ने तेलंगाना में 3.7 बिलियन डॉलर और हैदराबाद में अपना सबसे बड़ा डेटा सेंटर बनाने के लिए कुल 17.5 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। AWS ने भी 2030 तक भारत में 12.7 बिलियन डॉलर निवेश करने का वादा किया है।

    डेटा सेंटर से पैदा होंगे नए रोजगार के अवसर
    डेटा सेंटर से पैदा होंगे नए रोजगार के अवसर - फोटो : AI जनरेटेड

    डेटा सेंटर से पैदा होंगे नए रोजगार के अवसर

    यह विकास सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारी संख्या में नौकरियां भी पैदा करेगा। ठीक वैसे ही, जैसे 1990 के दशक में आईटी सेक्टर ने लाखों नौकरियां दी थीं। अब सिर्फ कोडिंग जानने वालों की ही नहीं, बल्कि बड़े सर्वर संभालने, लिक्विड कूलिंग सिस्टम मैनेज करने, पावर सिस्टम और साइबर सुरक्षा के जानकारों की जरूरत होगी।

    पूरी दुनिया में कुशल फाइबर तकनीशियनों की कमी महसूस की जा रही है। अमेरिका में तो इसके लिए खास ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किए गए हैं। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, जीपीयू क्लस्टरिंग और साइबर सुरक्षा के जानकारों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा, 'इंटरकनेक्शन आर्किटेक्चर' जैसे नए क्षेत्रों में भी कुशल लोगों की जरूरत होगी।

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