पेगासस स्पायवेयर: ये सावधान होने की कॉल है, 'बेलगाम' पावर के दौर में मोबाइल फोन के कैमरे पर टेप लगाने से रुकेगी 'जासूसी'!

सार

सरकार का कहना है कि देश में किसी का भी फोन गैर कानूनी तरीके से टैप नहीं किया जाता। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर, वह भी एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालने करते हुए फोन टैप करने की इजाजत दी जा सकती है।

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Pegasus spyware this a wake up call for us we can stop spying with a tape on phone camera
hacker - फोटो : pixabay

    विस्तार

    'पेगासस स्पायवेयर' ने दुनिया में तहलका मचा दिया है। आरोप है कि मोबाइल फोन के जरिए लोगों की 'जासूसी' की जा रही है। इस सूची में राजनेता व सरकार में शामिल व्यक्तियों के अलावा, पत्रकार, वैज्ञानिक, सिविल सोसायटी कार्यकर्ता और कानूनी एवं न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोग बताए गए हैं। इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक सवाल उठ रहे हैं। क्या ये हमारे लिए 'वेक अप' कॉल है, सावधानी बरतने का अलर्ट है, क्या मोबाइल फोन, जिसे हमने सुपर कंप्यूटर मान लिया है, उसके कैमरे पर टेप लगाने से जासूसी रुक जाएगी।

    कोरोनाकाल में 'डर व घबराहट' को हथियार बनाकर कोई हमें टारगेट कर रहा है। डिजिटल प्राइवेसी का उल्लंघन और सरकार के हाथ में 'बेलगाम' पावर, देश के प्रख्यात आईटी एवं साइबर मामलों के एक्सपर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील पवन दुग्गल ने सिलसिलेवार तरीके से इन सवालों के जवाब दिए हैं। पढ़िये, पेगासस स्पायवेयर के जरिए 'जासूसी' की मैराथन दौड़ कब शुरु हुई और अब ये कैसे व कहां पहुंचकर खत्म होगी।

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    इस तरह अपना काम शुरू कर देता है पेगासस स्पायवेयर

    इस्राइल के पेगासस स्पायवेयर का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा रहा है। यह एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम होता है, जिसकी मदद से किसी भी फोन को हैक किया जा सकता है। टारगेट पर्सन के फोन पर एक लिंक आता है। वह जैसे ही लिंक पर क्लिक करता है, पेगासस स्पायवेयर अपना काम शुरू कर देता है। फोन में जहां पर भी और कितने ही सुरक्षित तरीके से डाटा क्यों न रखा गया हो, वह निकाल लिया जाता है। फोटो, वीडियो, एसएमएस व ईमेल आदि कुछ भी नहीं बचता।

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    आईटी एवं साइबर मामलों के एक्सपर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील पवन दुग्गल

    नेअमर उजाला डॉट कॉमके साथ बातचीत में कहा, ये बात सही है कि कोरोनाकाल के बाद लोगों में 'डर व घबराहट' का माहौल पैदा हो गया है। इसे हथियार बनाकर लोगों को टारगेट किया जा रहा है। कुछ माह पहले जब देश में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचाई तो दवा, इंजेक्शन, ऑक्सीजन और दूसरे उपकरणों की किल्लत हो गई। लोगों के फोन पर एसएमएस और ईमेल के लिए उक्त वस्तुएं मुहैया कराने वालों के संदेश आने लगे। मुसीबत का समय था तो बहुत से लोगों ने जान बचाने के चक्कर में अज्ञात सोर्स से आई ईमेल, एसएमएस और वॉट्सएप पर आए लिंक को क्लिक कर दिया। यही गलती, आपका फोन 'जासूस' के हवाले कर देती है।

    बकौल पवन दुग्गल, कोरोना महामारी के दौरान कई तरह के अंकुश लगाए गए। नए सॉफ्टवेयर देखने को मिले हैं। ऐसे आरोप भी लगते रहे कि कोरोनाकाल में विभिन्न एप के जरिए लोगों की निजी जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि सरकार ने इस बात से इनकार कर दिया। सरकार का कहना है कि देश में किसी का भी फोन गैर कानूनी तरीके से टैप नहीं किया जाता। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर, वह भी एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालने करते हुए फोन टेप करने की इजाजत दी जा सकती है।

    कोरोना या राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में कथित तौर पर इंटरसेप्ट प्रक्रिया का उल्लंघन भी हो जाता है। कई बार 'इंटरसेप्ट' को 'मॉनिटर' कह कर जायज ठहराने का प्रयास होता है। दुग्गल के अनुसार, पेगासस स्पायवेयर हमारे लिए एक अलर्ट है। ये लोगों के लिए वेक अप कॉल है। खासतौर पर साइबर अपराधों को लेकर, लोगों को सावधानी बरतनी होगी। लोग, साइबर सुरक्षा को अपनी जीवन शैली का हिस्सा बना लें। एक मिनट नहीं, बल्कि 24 घंटे आपको सावधान रहने की जरूरत है।

    पेगासस स्पायवेयर की तर्ज पर जासूसी के अनेक सॉफ्टवेयर मार्केट में मौजूद हैं। आपको बचने का उपाय तलाशना है। मिस कॉल अज्ञात सोर्स से आई है तो उसका जवाब न दें। खासतौर पर, किसी दूसरे देश से आई कॉल को लेकर विशेष सावधानी बरतें। अदृश्य तरीकों से मोबाइल का माइक्रो फोन चालू हो जाता है। दुग्गल कहते हैं, मोबाइल फोन को जब से हमने सुपर कंप्यूटर माना है, वह हमारा दुश्मन बन गया है। फोन में एप, कम से कम रखें। अपना डाटा बैक अप पर रखें। अगर जरूरत नहीं है तो मोबाइल फोन के कैमरे को ढंक लें। उस पर टेप लगा दें।

    आपको मालूम नहीं है कि साफ्टवेयर के जरिए फोन हैक हो चुका है। फोन का कैमरा अपने आप चालू हो जाता है। मोबाइल फोन में मौजूद फोटो, वीडियो और अन्य फाइलें तुरंत हैकर के पास चली जाती हैं। पेगासस के जरिए फोन पर हुई बातचीत भी पता लग सकती है। यदि फोन में एक बार हैकर द्वारा भेजा गया लिंक एक्टिव हो जाता है तो यह मानकर चलें कि वह फोन केवल सुनने और करने के लिए ही आपके पास है। फोन पर मौजूद तमाम दस्तावेज और फाइलें ट्रांसफर हो जाती हैं।

    ध्यान रखें कि सरकार के पास बेलगाम पावर न हो

    सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पवन दुग्गल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कोविड के बाद साइबर स्पेस में जो बदलाव आया है, उसके अंतर्गत सरकार के पास बेलगाम पावर बढ़ती जा रही है। लोगों को इस पर खास निगाह रखनी है। किसी बहाने से सरकार आपकी डिजिटल प्राइवेसी का सुरक्षा चक्र तो नहीं तोड़ रही है, यह ध्यान रखना होगा।

    हमारे देश में अभी आईटी कानून पर्याप्त और मजबूत नहीं हैं। सरकार का प्रयास होता है कि ज्यादा से ज्यादा अंकुश लगाया जाए। ऐसे में विपक्ष और जनता की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे देखें, सरकार के पास असीमित अधिकार न रहें। इंटरसेप्ट करने के नियम को सरकार अपना अधिकार न समझ बैठे। डाटा प्रोटेक्शन बिल को जल्द से जल्द कानून का रूप प्रदान किया जाए। उसमें ऐसे प्रावधान शामिल हों कि कोई भी व्यक्ति, संगठन या सरकार, लोगों की प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ न कर सके। आईटी एक्ट में भी संशोधन करना होगा। अगर सरकार ईमानदारी एवं निष्पक्षता के साथ ये सब करती है तो ही पेगासस स्पायवेयर जैसी तकनीक के जरिये जासूसी की मैराथन दौड़ को रोका जा सकता है।

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