नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों की सीमाओं को जानने की जरूरत, फर्जी खबरों के आईटी नियम पर बॉम्बे हाई कोर्ट

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Fri, 07 Jul 2023 02:38 PM IST
सार

कल इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि नियम बनाते समय इरादे चाहे कितने भी प्रशंसनीय या ऊंचे क्यों न हों, अगर किसी नियम या कानून का प्रभाव असंवैधानिक है तो उसे जाना ही होगा।

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needs to know the boundaries and limits of the words used in the Rules says Bombay HC on IT Rules on fake news
Bombay High Court - फोटो : Amar Ujala

    विस्तार

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फर्जी खबरों के खिलाफ हाल ही में संशोधित नए आईटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी कानून में अबाध्य और असीमित विवेकाधीन अधिकार होना स्वीकार्य है? बता दें कि कल इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि नियम बनाते समय इरादे चाहे कितने भी प्रशंसनीय या ऊंचे क्यों न हों, अगर किसी नियम या कानून का प्रभाव असंवैधानिक है तो उसे जाना ही होगा।

    न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि इससे पहले कि यह पता चले कि नियमों का नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, उसे नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों- नकली, गलत और भ्रामक - की सीमाओं को जानने की जरूरत है।

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    दरअसल, स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स ने सरकार के इन नियमों के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और उन्हें मनमाना, असंवैधानिक बताया है। याचिका में कहा गया है कि इन नियमों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर डराने वाला प्रभाव होगा।

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    इससे पहले इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा था कि चाहे इरादे कितने भी प्रशंसनीय या ऊंचे क्यों न हों, अगर इसका प्रभाव असंवैधानिक है तो इसे जाना ही होगा।

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