देश में गीगावॉट-स्केल AI डेटा सेंटर की तैयारी: L&T और NVIDIA ने मिलाया हाथ, दो बड़े शहरों में बनेगा प्रोजेक्ट
L&T Nvidia Partnership:
भारत की दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दुनिया की सबसे मूल्यवान एआई चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया ने हाथ मिला लिया है। इनका लक्ष्य एक ऐसा संप्रभु एआई इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है, जो भारत को वैश्विक एआई मानचित्र पर सबसे ऊपर ले जा सके।

विस्तार
मुंबई में आयोजित इंडिया एआई समिट के दौरान लार्सन एंड टुब्रो ने एनवीडिया के साथ मिलकर गीगावॉट-स्केल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की अपनी रणनीतिक योजना सार्वजनिक की। इंडिया AI मिशन के तहत ये घोषणा भारत को वैश्विक AI हब बनाने की दिशा में एक औपचारिक और नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस साझेदारी की सबसे बड़ी खासियत इसका Sovereign (सॉवरेन) होना है। इसका मतलब है कि भारत का डाटा, एआई मॉडल और वर्कलोड देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रहेंगे। यह इंडिया एआई मिशन के तहत मेक इन इंडिया और एआई वर्क फॉर इंडिया की सोच को हकीकत में बदलेगा।
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चेन्नई और मुंबई बनेंगे एआई के नए ठिकाने
एलएंडटी अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को एआई के अनुकूल बनाने जा रही है:
चेन्नई
: यहां 300 एकड़ के विशाल कैंपस में 30 मेगावॉट की क्षमता वाला एनवीडिया जीपीयू क्लस्टर तैनात किया जाएगा।
मुंबई:
यहां निर्माणाधीन 40 मेगावॉट के नए डाटा सेंटर में भी अगली पीढ़ी का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर लगाया जाएगा। ये सेटअप इतना शक्तिशाली होगा कि दुनिया के बड़े क्लाउड प्रदाताओं और घरेलू कंपनियों को सुपरफास्ट कंप्यूटिंग प्रदान करेगा।
एनवीडिया एआई टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन
इस इंफ्रास्ट्रक्चर में एनवीडिया की एडवांस्ड एआई टेक्नोलॉजी को एकीकृत किया जाएगा। इसमें एनवीडिया के जीपीयू और सीपीयू, हाई-स्पीड नेटवर्किंग, एआई-एक्सेलेरेटेड स्टोरेज प्लेटफॉर्म, एनवीडिया एआई इंटरप्राइज सॉफ्टवेयर स्टैक और रेफरेंस आर्किटेक्चर शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सुरक्षित, तेज और स्केलेबल एआई डिप्लॉयमेंट को सक्षम बनाना है।
सॉवरेन एआई क्यों है इतना महत्वपूर्ण
यह मॉडल भारत के भीतर ही डेटा स्टोरेज, एआई मॉडल ट्रेनिंग और वर्कलोड डिप्लॉयमेंट की सुविधा देगा। यानी संवेदनशील डेटा देश की सीमाओं के अंदर सुरक्षित रहेगा। साथ ही यह वैश्विक एआई इकोसिस्टम के साथ इंटरऑपरेबल होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी भारत में एंकर होकर एआई क्षमता विकसित कर सकेंगी।
किन सेक्टरों को होगा फायदा
एआई फैक्टरी मॉडल विनिर्माण, ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं, हेल्थकेयर, सार्वजनिक सेवाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को गति देगा। इससे पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर प्रोडक्शन-स्केल तैनाती संभव होगी और औद्योगिक ऑटोमेशन को मजबूती मिलेगी। एलएंडटी समूह की कंपनियां भी इसी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लाइव एआई एजेंट तैनात करेंगी। इससे औद्योगिक संचालन, स्मार्ट फैक्टरी मॉडल और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गति मिलेगी, साथ ही एक इन-हाउस एआई इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित होगा।
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दिग्गजों ने क्या कहा?
एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यम के अनुसार ये निवेश भारत को एआई पायलट से प्रोडक्शन-स्केल तैनाती की दिशा में आगे बढ़ाएगा। वहीं एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ जेनसन हुआंग ने इसे वैश्विक स्तर पर चल रही सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का हिस्सा बताया और भारत को उभरते एआई हब के रूप में रेखांकित किया।
क्या इससे परिवर्तन होंगे?
टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार इस पहल से भारत में एंटरप्राइज-ग्रेड एआई क्षमता विकसित होगी। साथ ही तेज, सुरक्षित और स्केलेबल कंम्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक ऑफ-टेकर्स को आकर्षित कर सकता है। मेकिंग एआई इन इंडिया विजन को मजबूती मिल सकती है और भारत एआई उपयोगकर्ता देश से एआई निर्माता और संभावित निर्यातक देश की दिशा में बढ़ सकता है।