Tech: 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना सच करेगा डीप टेक, देश को प्रोडक्ट नेशन बनाना जरूरी- क्रिस गोपालकृष्णन
India Deep Tech Ecosystem:
इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लिए रिसर्च को वास्तविक उत्पाद और तकनीक में बदलना जरूरी है। उन्होंने मजबूत डीप टेक इकोसिस्टम बनाने के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को जरूरी बताया। उनका मानना है कि एआई और नई तकनीकों में निवेश और नवाचार से भारत वैश्विक स्तर पर 'प्रोडक्ट नेशन' बन सकता है और विदेशी निवेश को भी आकर्षित कर सकता है।

विस्तार
इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन ने दिल्ली में हो रहे इंडिया एआई इंपैक्ट को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा देश को 2047 तक विकसित बनने के लिए अपने रिसर्च को असली उत्पाद और तकनीक में बदलना जरूरी है। आपको बता दें कि क्रिस गोपालकृष्णन भारत की एक प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म और सीड-स्टेज स्टार्टअप एक्सिलोर वेंचर्स (Axilor Ventures) के चैयरमैन हैं। उनका कहना है कि मजबूत डीप टेक इकोसिस्टम बनाने के लिए रिसर्च संस्थानों, इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स के बीच अच्छा सहयोग और तालमेल होना बहुत जरूरी है।
रिसर्च को प्रोडक्ट में बदलना सबसे बड़ी चुनौती
क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि भारत में रिसर्च तो काफी हो रहा है लेकिन उसे बड़े स्तर पर प्रोडक्ट और तकनीक में बदलने की व्यवस्था और माहौल अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके कुछ उदाहरण जरूर हैं लेकिन अभी इस दिशा में और ज्यादा काम करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि डीप टेक स्टार्टअप्स अक्सर विश्वविद्यालयों और रिसर्च लैब्स में हुए काम से शुरू होते हैं। इसलिए ऐसा इकोसिस्टम बनाना जरूरी है जहां रिसर्च को आसानी से प्रोडक्ट और बिजनेस में बदला जा सके।
बेहतर इकोसिस्टम से बढ़ेगा विदेशी निवेश
उन्होंने कहा कि अगर भारत मजबूत डीप टेक इकोसिस्टम बनाता है तो इससे देश के साथ-साथ विदेशों से भी निवेश आएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टार्टअप्स में विदेशी निवेश पहले से आ रहा है और आने वाले समय में डीप टेक स्टार्टअप्स भी बड़ी मात्रा में वैश्विक निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
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इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग जरूरी
गोपालकृष्णन ने कहा कि नई तकनीक और इनोवेशन को बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री और शैक्षणिक संस्थानों को साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क का उदाहरण दिया जहां कंपनियां और शिक्षण संस्थान एक ही जगह पर मिलकर रिसर्च कर रहे हैं। इसी तरह आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली में भी इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के बीच अच्छा सहयोग देखने को मिल रहा है।
CII का इंडस्ट्री-स्टार्टअप कनेक्ट प्रोग्राम
उन्होंने बताया कि भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) एक खास प्रोग्राम चला रहा है जो कंपनियों और स्टार्टअप्स को जोड़ता है। इसमें कंपनियां अपनी समस्याएं और जरूरतें बताती हैं और उनके समाधान के लिए सही स्टार्टअप्स से उन्हें जोड़ा जाता है। यह प्रोग्राम नवाचार, एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) और स्टार्टअप्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत चल रहा है और इसका मकसद स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री के बीच सहयोग बढ़ाना है।
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हर सेक्टर में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर लगभग हर सेक्टर में दिख रहा है। एआई आने वाले समय की एक महत्वपूर्ण तकनीक है और यह भारत के तकनीकी विकास को और तेज करने में मदद करेगा।
तकनीकी मजबूती से ही बनेगा विकसित भारत
क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि भारत का विकसित देश बनने का सपना तकनीक और विज्ञान में मजबूत बनने पर निर्भर करता है। उनका मानना है कि जब देश तकनीकी रूप से मजबूत होगा तभी आर्थिक रूप से भी मजबूत बन पाएगा। उन्होंने कहा कि डीप टेक इकोसिस्टम के विकास से भारत एक 'प्रोडक्ट नेशन' बन सकता है। यानी भारत सिर्फ सेवाएं ही नहीं देगा बल्कि दुनिया के लिए नई तकनीक और उत्पाद भी बनाएगा। यह बदलाव भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।