गूगल सिर्फ 18 दिनों की कमाई से चुका सकता है 344 अरब रुपये का जुर्माना

गूगल पर यूरोपियन यूनियन ने 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना लगाया है जो कि गूगल के इतिहास में उसपर लगने वाला अबतक का सबसे बड़ा जुर्माना है। गूगल पर जुर्माने का फैसला उस आरोप के बाद हुआ है जिसमें कहा गया था कि गूगल ने एंड्रॉयड फोन में अपने एप को जबरदस्ती इंस्टॉल करवाए हैं और गलत तरीके से सर्च इंजन को पहले के मुकाबले मजबूत बनाया है। हालांकि ऐसा नहीं है कि गूगल को जुर्माना देना ही होगा, गूगल इसके खिलाफ अपना पक्ष रखते हुए अपना दावा भी पेश कर सकता है।
गूगल के खिलाफ अप्रैल 2015 में फेयरसर्च' नाम के एक बिजनेस ग्रुप ने यूरोपियन यूनियन में शिकायत की थी और कहा था कि गूगल अपने एप के जरिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन में अधिकार जमा रहा है।बता दें कि इस ग्रुप में नोकिया, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
यूरोपियन यूनियन ने गूगल को अपना बिजनेस नियम बदलने के लिए 90 दिनों का वक्त भी दिया है और अगर इस अवधि में गूगल अपने नियम नहीं बदलता है तो उसके ऊपर दैनिक औसत आय के 5 फीसदी का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ईयू की प्रतिस्पर्द्धा आयुक्त मार्गेट वेस्टागर ने एक बयान में कहा है कि गूगल मोबाइल निर्माता कंपनियों से बिना शुल्क लिए एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने के बदले अपने वेब ब्राउजर व सर्च इंजन को फोन में प्री-इंस्टॉल करने के लिए मजबूर करता है, जिससे अन्य ब्राउजर व सर्च इंजन के लिए मौका छिन जाता है।
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सिर्फ 18 दिन की कमाई से गूगल चुका है सकता है 344 अरब रुपये का जुर्माना
अगर गूगल चाहे तो इस जुर्माने की भरपाई अपनी 18 दिनों की कमाई से कर सकता है। अभी हाल ही में साल 2018 की पहली तिमाही रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक तिमाही में गूगल की कमाई 24.5 बिलियन डॉलर है। इसका मतलब यह है कि गूगल इसकी भरपाई अपनी 18 दिनों की कमाई से पूरी कर सकता है।
गूगल के खिलाफ अप्रैल 2015 में एक बिजनेस ग्रुप 'फेयरसर्च' ने यूरोपियन यूनियन में शिकायत की थी। इस ग्रुप में माइक्रोसॉफ्ट, नोकिया और ओरेकल जैसी कंपनियां शामिल हैं। फेयरसर्च ने अपनी शिकायत में कहा था कि गूगल एंड्रॉयड स्मार्टफोन में अपना एकाधिकार जमा रहा है। जिसके बाद इस पर तीन साल तक जांच चली और बुधवार को फैसला सुनाया गया।
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सुंदर पिचाई ने क्या कहा?
यूरोपियन यूनियन द्वारा जुर्माना लगाए जाने के बाद गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने अपने ब्लॉग के जरिए कहा है कि एक एंड्रॉयड फोन में आमतौर पर 40 एप पहले से लोडेड आते हैं जिसमें फोन निर्माता कंपनी और डेवलपर्स के एप भी शामिल होते हैं। ऐसे में कोई यूजर चाहे तो किसी भी एप को डिलीट या डिसेबल करके दूसरा एप डाउनलोड कर सकता है। बता दें कि पूरी दुनिया में 77 फीसदी एंड्रॉयड स्मार्टफोन हैं, 19 फीसदी आईओएस और 0.47 प्रतिशत माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज फोन हैं।
अगर गूगल पॉलिसी बदलता है तो क्या होगा?
इस जुर्माने के बाद अगर गूगल अपनी बिजनेस पॉलिसी में बदलाव करता है तो इसका सीधा अन्य कंपनियों के एप को होगा। उदाहरण के तौर पर एंड्रॉयड मोबाइल यूजर्स गूगल क्रोम के बदले मॉजिला फायरफॉक्स, यूसी ब्राउजर या फिर किसी अन्य ब्राउजर को अपने फोन में इंस्टॉल करेगा।