गूगल ही नहीं अन्य कंपनियां भी फोन में जबरदस्ती देती हैं अपना एप, क्या इन पर भी लगेगा जुर्माना

टेक डेस्क, अमर उजाला
Thu, 19 Jul 2018 04:37 PM IST
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Not only Google other companies also pre installed apps in their smartphones
android mobile apps

    गूगल पर यूरोपियन यूनियन ने एंड्रॉयड स्मार्टफोन में एकाधिकार जमाने के आरोप में 344 अरब रुपये का जुर्माना लगाया है जिसकी भरपाई गूगल चाहे तो सिर्फ अपनी 18 दिनों की कमाई से करता है लेकिन गूगल इस जुर्माने के खिलाफ अपना पक्ष भी रखेगा। वहीं इस जुर्माने के बाद गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने अपने ब्लॉग में फैसले की आलोचना की है और कहा है यूरोपियन यूनियन ने एंड्रॉयड में ज्यादा विकल्प मिलने की बात को दरकिनार कर दिया है।

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    वैसे अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ गूगल ही ऐसी कंपनी है जो अपने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ फोन में कुछ एप को डिफॉल्ट रूप से देता है। ऐसे बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि सैमसंग, मोटोरोला, शाओमी, ओप्पो और वीवो जैसी कंपनियां भी अपने फोन में अपने कुछ एप को देती हैं जिन्हें कई बार डिसेबल करना भी मुश्किल होता है। हालांकि इन कंपनियों का मामला उतना बड़ा नहीं है, क्योंकि इनके फोन में इनके एप की संख्या कम होती है। एप की संख्या कम होने के बावजूद भी अगर इन कंपनियों के खिलाफ कोई शिकायत करता है तो यूरोपियन यूनियन इस पर विचार करता है।

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    एप के जरिए कैसे कमाई करती हैं कंपनियां?

    अब एक और सवाल आपके जेहन में आ रहा होगा कि फोन में अपने-अपने एप को देने को लेकर इतनी मारामारी क्यों है। दरअसल अपने एप के जरिए एप को डेवलप करने वाली कंपनियां अपनी झोली भरती हैं। उदाहरण के तौर पर कंपनियां अपने एप के जरिए आपके सर्च पर नजर रखती हैं और उसके हिसाब से आपको विज्ञापन दिखाए जाते हैं जिसके बदले कंपनियों को मोटो पैसे मिलते हैं। मोबाइल पर दिखने वाले विज्ञापन को माइक्रो विज्ञापन कहा जाता है और इसमें सीधे उसी इंसान को किसी खास प्रोडक्ट का विज्ञापन दिखाया जाता है जिसने उस प्रोडक्ट के बारे में अपने फोन पर कुछ भी सर्च किया है।

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