नैनोमोटर्स की मदद से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मरम्मत खुद-ब-खुद

टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Tue, 15 Mar 2016 01:04 PM IST
सार
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electronic device could self-repair with the help of nanomotors

    विस्तार

    सोचिए क्या होगा अगर आपका खराब कंप्यूटर खुद-ब-खुद ठीक हो जाए? एक नए अध्ययन में पाया गया है कि नैनोमोटर्स की मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस खुद को ठीक करने में सक्षम हो सकती हैं।

    वैज्ञानिकों ने शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से प्रेरित होकर सेल्फ प्रोपेल्ड नैनोमोटर्स की तलाश की है, जोकि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की छोटी-मोटी खरोंच की खुद-ब-खुद मरम्मत कर सकते हैं। ऐसा माना है ‌कि एक दिन इनके जरिए फ्लैक्सिबेल बैटरी, इलेक्ट्रोड, सौर सेल और अन्य उपकरणों खुद ही ठीक हो सकेंगे।

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    कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से शोधकर्ता जैजिंग ली ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट इन दिनों बहुत प्रगतिशील हैं, लेकिन एक बेहद छोटी सी खामी पूरे ‌सिस्टम के ऊर्जा प्रवाह को बाधित कर सकती हैं और अंत में डिवाइस काम करना बंद कर देती है। इसको पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स टांका लगाने के साथ ठीक किया जा सकता है, लेकिन एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स की मरम्मत के निए एक नैनोस्केल पर इनोवेशन की आवश्यकता है।

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    ली ने कहा कि गैजेट्स जल्द ही पहले से कहीं अधिक सर्वव्यापी हो जाएंगे, हमारे कपड़े, प्रत्यारोपण और सामान में दिखाई देंगे, लेकिन नैनो सर्किट्स बैटरी इलेक्ट्रोड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ठीक करने का तरीका अभी भी चुनौती बना हुआ है।

    कैसे है मुमकिन

    नैनोमोटर्स की मदद से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मरम्मत खुद-ब-खुद

    टीम ने सोने और प्लैटिनम से नैनोकणों का निर्माण किया है जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड के जर‌िए काम करते हैं। प्लैटिनम फ्यूल को पानी और ऑक्सीजन में तोड़ने का काम करता है जो कणों बढ़ता है। परीक्षण से पता चला है कि लाइट-एमिटिंग डायोड या एलईडी से कनेक्टेड नैनोमोटर्स टूटी हुई इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की सतह पर तेजी से बढ़े। जब नैनोमाटर्स खरोंच से संपर्क मे आए, उन्होंने दोनों साइड्स के बीच की खाई पाटने का काम किया। क्योंकि कणों प्रवाहकीय धातुओं के बने होते हैं, इसलिए फिर से प्रवाह के लिए धारा को अनुमति दी और एलईडी जलाया।

    ली ने कहना है कि नैनोमोटर्स मुश्किल से मरम्मत होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आदर्श होगा जैसे सौर सेल्स की प्रवाहकीय परत, जो सख्त मौसम के कारण स्क्रेचिंग से ग्रस्त हो जाते हैं। इसका इस्तेमाल फ्लैक्सिबेल सेंसर और बैटरी को भी ठीक करने में हो सकेगा, वांग प्रयोगशाला इसको भी विकसित कर रहा है।

    अध्ययन अमेरिकन केमिकल सोसायटी 251 राष्ट्रीय बैठक और प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया है।

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