Deepfake: निर्मला सीतारमण का डीपफेक वीडियो दिखाकर बुजुर्ग से 7.9 लाख की ठगी
Nirmala Sitaraman Deepfake:
यूट्यूब पर डीपफेक वीडियो देखकर कर्नाटक के बेलगावी में एक 76 वर्षीय बुजुर्ग ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फर्जी एआई वीडियो दिखाकर उन्हें 7.9 लाख रुपये एंठ लिए। जानिए क्या है पूरा मामला।

विस्तार
आजकल साइबर ठग लोगों को लूटने के लिए हाई-टेक तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला कर्नाटक के बेलगावी शहर से सामने आया है, जहाँ प्रकाश गुब्बी नाम के 76 वर्षीय बुजुर्ग ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का शिकार हो गए।
इस बार ठगों ने किसी आम इंसान नहीं, बल्कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम और चेहरे का इस्तेमाल किया। बुधवार को सामने आए इस मामले ने पुलिस और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
यूट्यूब पर मौदूद था डीपफेक वीडियो?
बेलगावी के पुलिस कमिश्नर भूषण गुलाबराव बोरासे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बुजुर्ग प्रकाश गुब्बी ने पिछले साल नवंबर में यूट्यूब पर एक वीडियो देखा था। इस वीडियो में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक इन्वेस्टमेंट स्कीम को प्रमोट करती नजर आ रही थीं। वीडियो के डिस्क्रिप्शन में निवेश करने के लिए एक लिंक भी दिया गया था।
बुजुर्ग ने उस लिंक पर क्लिक करके अपनी सारी जानकारी भर दी। इसके कुछ ही समय बाद, सोशल मीडिया पर 'आदर्श आनंद' नाम के एक शख्स ने उनसे संपर्क किया और बातों में उलझाकर उन्हें पैसे निवेश करने के लिए राजी कर लिया।
मुनाफे का लालच दिखाकर ट्रांसफर करवा लिए पैसे
शिकायत के अनुसार, बुजुर्ग ने शुरुआत में एक बहुत छोटी सी रकम निवेश की थी। इसके बाद ठगों की एप्लीकेशन पर उन्हें 65,000 डॉलर का भारी-भरकम मुनाफा दिखने लगा। यह सब उनका भरोसा जीतने की एक चाल थी।
जब प्रकाश ने इस रकम को निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उनसे कस्टम ड्यूटी के नाम पर 4.2 लाख रुपये की मांग की। ठगों ने कहा कि इस टैक्स को चुकाए बिना पैसे अकाउंट में नहीं आएंगे। बुजुर्ग ने यह रकम भी दे दी, लेकिन इसके तुरंत बाद उनसे 2 लाख रुपये और मांगे गए। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बड़े स्कैम का शिकार हो चुके हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े में उन्होंने अपने करीब 7.9 लाख रुपये गंवा दिए।
पुलिस की कार्रवाई और सख्त चेतावनी
इस मामले में 1 मई को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस जांच में जुटी है। पुलिस कमिश्नर ने आम जनता को सचेत करते हुए कहा है कि इंटरनेट पर मौजूद ऐसे किसी भी वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। उन्होंने साफ किया कि वित्त मंत्री कभी भी इस तरह की किसी स्कीम का प्रचार नहीं करती हैं।
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उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि इंटरनेट पर मिलने वाले उन ऑफर्स से हमेशा दूर रहें जो जरूरत से ज्यादा अच्छे या मुनाफे वाले लगते हों। अपना पैसा हमेशा रजिस्टर्ड और भरोसेमंद एजेंसियों के जरिए ही निवेश करें।
क्या है डीपफेक तकनीक?
कमिश्नर ने बताया कि ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके यह वीडियो बनाया था। डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिससे किसी भी इंसान की शक्ल और आवाज को हूबहू कॉपी करके फर्जी वीडियो या ऑडियो तैयार किया जा सकता है। इससे कोई भी व्यक्ति पर्दे पर वो सब बोलता हुआ दिखाई दे सकता है, जो उसने असल में कभी कहा ही न हो। आज के समय में यह भ्रामक जानकारी फैलाने का एक बेहद खतरनाक हथियार बन गया है।
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