Meta पर बड़ा आरोप: AI ट्रेनिंग के लिए पाइरेटेड किताबों का किया इस्तेमाल, पब्लिशर्स ने ठोका मुकदमा

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Wed, 06 May 2026 06:04 PM IST
सार

Meta Lawsuit In USA:

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अंधी रेस जीतने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां चोरी का सहारा ले रही हैं? फेसबुक (Facebook) की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) पर एक बेहद गंभीर आरोप लगा है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने अपने AI को होशियार बनाने के लिए लाखों पायरेटेड किताबों का गैरकानूनी इस्तेमाल किया।

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मेटा पर लगे गंभीर आरोप - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री में इन दिनों एक के बाद एक नए विवाद सामने आ रहे हैं। इस बार निशाने पर टेक दिग्गज मेटा है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने पावरफुल एआई मॉडल लामा (Llama AI) को समझदार बनाने के लिए लेखकों की मेहनत यानी उनकी किताबों और आर्टिकल्स का बिना इजाजत इस्तेमाल किया है। यह मामला इतना बढ़ गया है कि दुनिया के कई बड़े पब्लिशर्स ने मेटा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

    वैराइटी (Variety) की एक रिपोर्ट के अनुसार, जाने-माने लेखक स्कॉट टुरो और पांच बड़े पब्लिशर्स ने मिलकर न्यूयॉर्क के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। शिकायतकर्ताओं का सीधा आरोप है कि मेटा ने अपने AI सिस्टम को विकसित करने के लिए लाखों किताबों, जर्नल्स और लिखित दस्तावेजों की गैरकानूनी तरीके से कॉपी बनाई है।

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    पायरेटेड साइट्स से उठाया गया डेटा

    शिकायत में यह भी चौंकाने वाला दावा किया गया है कि मेटा ने अपने AI प्रोजेक्ट की स्पीड बढ़ाने के लिए इंटरनेट के बड़े हिस्सों को खंगाला और पायरेटेड (चोरी-छिपे कंटेंट देने वाले) स्रोतों से डेटा डाउनलोड किया। आरोप है कि एआई की ट्रेनिंग के दौरान कॉपीराइट वाले कंटेंट को बार-बार कॉपी और इस्तेमाल किया गया।

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    इस मामले की सबसे सनसनीखेज बात यह है कि कोर्ट में दायर दस्तावेजों में सीधे तौर पर मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का नाम लिया गया है। वादियों का दावा है कि जुकरबर्ग ने व्यक्तिगत रूप से इस कॉपीराइटेड सामग्री के इस्तेमाल को "मंजूरी दी और सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया।"

    शुरुआत में, मेटा ने पब्लिशर्स के साथ लाइसेंसिंग समझौते पर विचार किया था। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, 2023 की शुरुआत में मेटा की इंटरनल टीमों ने डेटा लाइसेंसिंग के बजट को 200 मिलियन डॉलर (करीब 1600 करोड़ रुपये) तक बढ़ाने पर चर्चा भी की थी। लेकिन, आरोप है कि जब यह मामला मार्क जुकरबर्ग तक पहुंचा, तो उन्होंने लाइसेंस खरीदने की इस बातचीत को ही रुकवा दिया।

    चेतावनी के बावजूद नहीं मानी कंपनी

    मुकदमे में यह भी कहा गया है कि मेटा के कर्मचारियों को अच्छी तरह पता था कि पायरेटेड किताबों का इस्तेमाल करना कानूनी रूप से कितना खतरनाक हो सकता है। अंदरूनी तौर पर इस पर चर्चा भी हुई थी, लेकिन इन चिंताओं को दरकिनार करते हुए कंपनी ने भारी मात्रा में इस डेटा का इस्तेमाल जारी रखा।

    लेखकों और पब्लिशर्स का क्या है डर?

    पब्लिशर्स का तर्क बेहद साफ है। उनका कहना है कि मेटा का AI सिस्टम अब उनके ओरिजिनल काम की नकल कर सकता है, उसकी समरी (सारांश) बना सकता है और उसी के जैसा नया टेक्स्ट जनरेट कर सकता है। इससे सीधे तौर पर ओरिजिनल किताबों और रिसर्च पेपर्स की मार्केट वैल्यू गिरेगी, जिससे लेखकों और पब्लिशर्स को भारी आर्थिक नुकसान होगा।

    मेटा ने कहा "हम कोर्ट में लड़ेंगे"

    इन सभी गंभीर आरोपों पर मेटा ने अपनी गलती मानने से साफ इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के एक प्रवक्ता ने बयान दिया है कि कॉपीराइटेड सामग्री पर AI को ट्रेनिंग देना अमेरिकी कानून के तहत "फेयर यूज" (उचित उपयोग) के दायरे में आ सकता है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि वह अदालत में इस मुकदमे का डटकर सामना करेगी।

    आपको बता दें कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। आज के समय में जेनरेटिव AI मॉडल्स को ट्रेनिंग देने के लिए लेखकों, संगीतकारों और मीडिया संस्थानों के डेटा के धड़ल्ले से इस्तेमाल पर कई अन्य AI कंपनियों को भी इसी तरह के कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'टेक बनाम राइटर' की लड़ाई भविष्य में क्या नया मोड़ लेती है।

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