Sound Therapy: क्या 'साउंड थेरेपी' से होगा अल्जाइमर का इलाज? बंदरों पर हुए शोध में जगी उम्मीद की नई किरण

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 16 Jan 2026 02:45 PM IST
सार

Sound Therapy:

वैज्ञानिकों के एक ताजा शोध से यह उम्मीद जगी है कि कम फ्रीक्वेंसी वाली आवाजों के जरिए अल्जाइमर जैसी लाइलाज बीमारी का इलाज संभव हो सकता है। बंदरों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि 40 हर्ट्ज (Hz) की ध्वनि मस्तिष्क से हानिकारक गंदगी को बाहर निकालने में काफी मददगार साबित होती है।

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साउंड थेरेपी (सांकेतिक) - फोटो : freepik

    विस्तार

    जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे दिमाग में बीटा-एमाइलॉयड नाम का एक हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगता है। यह प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओं के ऊपर एक परत या 'प्लाक' बना देता है, जिससे सेल्स आपस में बात नहीं कर पाते और याददाश्त कमजोर होने लगती है। इसी स्थिति को हम अल्जाइमर कहते हैं।

    हाल ही में 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जब बंदरों को 40 हर्ट्ज की आवाज सुनाई गई, तो उनके मस्तिष्क के तरल पदार्थ में इस हानिकारक प्रोटीन की मात्रा बढ़ी हुई पाई गई। इसका सीधा सा मतलब है कि यह आवाज दिमाग से इस जहरीले कचरे को तेजी से बाहर निकालने में मदद कर रही थी।

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    40 हर्ट्ज की आवाज का कमाल

    हमारा दिमाग बिजली के सिग्नल और एक खास लय पर काम करता है। यह लय ही दिमाग की सफाई व्यवस्था को नियंत्रित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अल्जाइमर होने पर यह लय बिगड़ जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 40 हर्ट्ज की साउंड थेरेपी दिमाग के इस बिगड़े हुए तालमेल को फिर से पटरी पर ला सकती है, जिससे सफाई सिस्टम को पता चल जाता है कि उसे कब और कहां काम करना है।

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    उत्साहजनक रहे नतीजे
    उत्साहजनक रहे नतीजे - फोटो : Freepik.com

    शोध में क्या आया सामने?

    चीन की कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के वैज्ञानिकों ने 9 बूढ़े बंदरों पर यह प्रयोग किया। उन्हें एक हफ्ते तक रोजाना एक घंटे के लिए खास आवाजें सुनाई गईं। नतीजे चौंकाने वाले थे। बंदरों के मस्तिष्क से निकलने वाले तरल पदार्थ में हानिकारक प्रोटीन की मात्रा 200 प्रतिशत तक बढ़ गई। खास बात यह रही कि आवाज बंद करने के 5 हफ्ते बाद भी दिमाग की यह सफाई प्रक्रिया जारी रही।

    क्या यह पक्का इलाज है?

    हालांकि नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन विशेषज्ञ अभी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इंस्टीट्यूट फॉर बायोइंजीनियरिंग ऑफ कैटालोनिया के प्रोफेसर ग्यूसेप बटाग्लिया का कहना है कि यह शोध अभी बहुत छोटे स्तर पर हुआ है। बंदरों पर असर दिखने का मतलब यह नहीं है कि इंसानों पर भी यह उतना ही प्रभावी होगा। इंसानों की याददाश्त और व्यवहार पर इसके लंबे समय तक पड़ने वाले असर को जानने के लिए अभी कई परीक्षणों की जरूरत है।

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    क्या घर पर सुनना फायदेमंद है?

    आजकल इंटरनेट पर 40 हर्ट्ज का संगीत आसानी से मिल जाता है। जानकारों का कहना है कि इसे कम आवाज में सुनने से नुकसान तो नहीं है, लेकिन इसके फायदों का अभी कोई पुख्ता सबूत नहीं है। लैब में इस्तेमाल की गई आवाजों की बनावट और वॉल्यूम बहुत सटीक होती है। पूरी दुनिया में करीब 5.5 करोड़ लोग अल्जाइमर से जूझ रहे हैं और फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। ऐसे में यह साउंड थेरेपी भविष्य में एक सस्ता और सुरक्षित रास्ता दिखा सकती है।

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