AI Appreciation Day: भारतीय भाषाएं सिखने लगा AI, गोंडी जैसी आदिवासी भाषाओं को मिलेगी खोई हुई पहचान
उदाहरण के तौर पर, गोंडी भाषा को लगभग 30 लाख लोग बोलते हैं, लेकिन इसकी डिजिटल उपस्थिति बेहद सीमित रही है। यह बदलाव AI के लिए एक चुनौती और एक अवसर दोनों पेश करता है कि क्या हम इंटरनेट को इन भाषाओं के लिए अधिक सुलभ और उपयोगी बना सकते हैं?

विस्तार
16 जुलाई को AI Appreciation Day मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 16 जुलाई 2021 को हुई थी और तब से हर साल 16 जुलाई को हम एआई एप्रिसिएशन डे मनाते हैं। एआई आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हो गया है और यह हमारी जिंदगी में इतना घुस गया है कि यह हमारी नकल करने लगा है और यहां तक कि यह हमारी भाषाओं को भी सीख रहा है। एक रिसर्च से इसकी जानकारी मिली है।
अब भारतीय इंटरनेट का नेतृत्व सिर्फ मेट्रो शहरों और अंग्रेजी भाषी दर्शकों के पास नहीं है। यह तेजी से ग्रामीण और शहरी इलाकों तक फैल रहा है, जहां लोग सैकड़ों क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं में संवाद करते हैं जिनमें से कई भाषाएं आज भी डिजिटल दुनिया में उपेक्षित हैं।
उदाहरण के तौर पर, गोंडी भाषा को लगभग 30 लाख लोग बोलते हैं, लेकिन इसकी डिजिटल उपस्थिति बेहद सीमित रही है। यह बदलाव AI के लिए एक चुनौती और एक अवसर दोनों पेश करता है कि क्या हम इंटरनेट को इन भाषाओं के लिए अधिक सुलभ और उपयोगी बना सकते हैं?
भारत में 22 संवैधानिक भाषाएं और सैकड़ों बोलियां हैं, जिनमें लोग अक्सर एक ही वाक्य में कई भाषाओं का प्रयोग करते हैं। आज अधिकतर AI मॉडल अंग्रेजी, हिंदी या तमिल जैसी भाषाओं पर आधारित होते हैं, लेकिन करोड़ों भारतीय ऐसी भाषाओं में बात करते हैं जिनके पास डिजिटल डेटा कम है। इसका सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ता है जहां शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं या सरकारी जानकारी AI पर निर्भर होती जा रही है। भारत में माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां समावेशी AI विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही हैं, ताकि देश की भाषाई विविधता कायम रहे।
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