एक अप्रैल से बढ़ सकती हैं वोडाफोन-आइडिया मोबाइल सेवा की दरें  

प्रदीप पाण्डेय
PTI, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Thu, 27 Feb 2020 07:38 PM IST
सार
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AGR dues on Vodafone idea: Service cost may be increased from 1 April
vodafone idea

    विस्तार

    दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने मोबाइल डाटा के लिए शुल्क बढ़ाकर न्यूनतम 35 रुपये प्रति जीबी की दर तय करने की मांग की है। यह मौजूदा दर का करीब सात-आठ गुना है। कंपनी ने इसके साथ ही एक निर्धारित मासिक शुल्क के साथ कॉल सेवाओं के लिए छह पैसे प्रति मिनट की दर तय करने की भी मांग की है।

    अभी मोबाइल डाटा की दरें 4-5 रुपये प्रति जीबी है। कंपनी ने कहा है कि उसे समायोजित सकल आय (एजीआर) बकाया का भुगतान करने में सक्षम बनाने तथा उसके कारोबार को परिचालन योग्य बनाने के लिए एक अप्रैल से ये नई दरें लागू की जानी चाहिए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने एजीआर बकाए के भुगतान के लिए 18 साल की समयसीमा की मांग की है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा है कि उसे ब्याज व जुर्माने के भुगतान से तीन साल की छूट भी मिलनी चाहिए।

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    एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, 'वोडाफोन आइडिया ने परिचालन में बने रहने के लिए सरकार से कई मांगें की है। कंपनी चाहती है कि एक अप्रैल 2020 से मोबाइल डाटा का शुल्क न्यूनतम 35 रुपये प्रति गीगा बाइट (जीबी) तथा न्यूनतम 50 रुपये का मासिक कनेक्शन शुल्क निर्धारित हो। ये काफी कठिन मांगें हैं और इन्हें मान पाना सरकार के लिए समस्या है।' कंपनी ने ये मांगें ऐसे समय की है जब वह पहले ही पिछले तीन महीने के भीतर मोबाइल सेवाओं की दरें 50 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है।

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    सांविधिक बकाया चुकाने में असमर्थता जताई

    संकट में चल रही वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग को पत्र लिखकर समायोजित सकल आय (एजीआर) का पूरा सांविधिक बकाया चुकाने में असमर्थता जताई है। कंपनी का कहना है कि सरकार के तत्काल मदद मुहैया कराए बिना उसके लिये यह बकाया चुकाना संभव नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा है कि यदि सरकार की ओर से मदद नहीं मिलती है तो बकाया राशि को चुकाने में उसे 15 साल लग जाएंगे।

    संचार मंत्रालय को लिखे पत्र में कंपनी ने कहा कि संकट से गुजर रहे दूरसंचार उद्योग की मदद के लिए सरकार को आधार कीमत की व्यवस्था लागू करनी चाहिए और शुल्क में कटौती भी करनी चाहिए। वहीं कंपनी ने अपने सांवधिक बकाया को किश्तों में चुकाने की अनुमति भी मांगी है। कंपनी पर 53,000 करोड़ रुपये से अधिक का सांविधिक बकाया है। जबकि वह अभी तक इसका मुश्किल से सात प्रतिशत ही अदा कर पायी है।

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    कंपनी ने कहा, ‘‘उसकी माली हालत ठीक नहीं है।’’ वह अपने उत्तरदायित्व को तभी पूरा कर सकती है जब सरकार सांविधिक बकाया पर ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज को किश्तों में चुकाने का विकल्प प्रदान करे। साथ ही माल एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत इकट्ठा हुए इनपुट टैक्स क्रेडिट के बकाये का भुगतान कर दे।

    कंपनी ने कहा कि सरकार के जीएसटी बकाये का समायोजन करने से उसे सांविधिक बकाया चुकाने में मदद मिलेगी। कंपनी को स्वयं के आकलन के आधार पर सरकार से जीएसटी क्रेडिट बकाये के रूप में करीब 8,000 करोड़ रुपये चाहिए।

    पिछले कुछ सालों से घाटे में चल रही कंपनी ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र पर वित्तीय दबाव जगजाहिर है। कंपनी ने मौजूदा समय में अपने 10,000 कर्मचारियों और 30 करोड़ ग्राहकों का हवाला देखकर सरकार से समर्थन की मजबूत अपील की है।

    दूरसंचार विभाग एजीआर भुगतान मुद्दे पर कर रहा है विचार: वित्त मंत्री

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि दूरसंचार विभाग टेलीकॉम कंपनियों पर सांविधिक बकाया के भुगतान से जुड़े मुद्दे पर गौर कर रहा है। 15 दूरसंचार कंपनियों की सरकार के प्रति 1.47 लाख करोड़ रुपये की देनदारी है, जिनमें 92,642 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस के रूप में भुगतान नहीं किया गया और 55,054 करोड़ रुपये का बकाया स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का है। कुल बकाए का 60 फीसद एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर है।

    दूरसंचार कंपनियों के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उद्योगपति सुनील भारती मित्तल और कुमार मंगलम बिड़ला ने वित्त मंत्री से भेंट की थी। वित्त मंत्री ने एजीआर मुद्दे पर कहा, 'हां, बैठक हुई है। विभाग निर्णय ले रहा है, इसलिए मेरे लिए फिलहाल इस पर कुछ कहना उपयुक्त नहीं होगा। विभाग के फैसले का इंतजार कीजिए।'

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