देश में 40 करोड़ से ज्यादा गेमर्स: 8 करोड़ हैं ऑनलाइन गेमिंग की लत के शिकार, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
भारत में ऑनलाइन गेमिंग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ गेमिंग एडिक्शन का खतरा भी बढ़ता दिख रहा है। सरकारी एजेंसी I4C के अनुसार लाखों युवा इसकी लत का शिकार हैं। WHO ने भी गेमिंग डिसऑर्डर को मानसिक बीमारी माना है।

विस्तार
देश में युवाओं के बीच कई ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स काफी पॉपुलर हैं। कई गेम्स को तो हर दिन करोड़ों यूजर्स खेलते हैं। हाल ही में भारत सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी I4C ने गेमिंग की लत और उसके दुष्प्रभाव को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने एक पोस्ट में बताया कि ऑनलाइन गेमिंग अब सिर्फ एंटरटेन्मेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब युवाओं में लत बन गया है, जिसके बुरे प्रभाव अब दिखने लगे हैं।
गेम डिजाइन के वजह से लगती है लत
एजेंसी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च (NIMHANS) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि गेमिंग एडिक्शन का दिमाग पर क्या असर होता है। रिसर्च के मुताबिक, गेम बनाने वाली कंपनियां गेम्स को ऐसे डिजाइन करती हैं, ताकि प्लेयर उसे बार-बार खेले। गेम खेलने से दिमाग डोपामिन केमिकल रिलीज करता है, जिससे खेलने की इच्छा बढ़ जाती है और धीरे-धीरे यह लत बन जाती है।
देखें साइबर दोस्त I4C की पोस्ट
चिड़-चिड़े हो जाते हैं प्लेयर्स
I4C ने बताया कि गेम खेलने की लत की वजह से प्लेयर्स चिड़-चिड़े हो जाते हैं और हारने पर गुस्सा करते हैं या खुद को नुकसान भी पहुंचा लेते हैं। अगर प्लेयर से फोन लेने कि कोशिश की जाती है तो वे गुस्सा करते हैं और इतने नाराज हो जाते हैं कि सुसाइड करने तक का कदम उठा लेते हैं।
ऑनलाइन गेम की लत को कैसे पहचानें?
- यदि कोई घंटों तक बिना रुके गेम खेलता रहे।
- हारने पर गुस्सा करते हैं या चिड़चिड़े हो जाते हैं।
- खाना समय पर नहीं खाते या बार-बार कहने पर भी नहीं सुनते।
- पढ़ाई में परफॉर्मेंस खराब होने लगे या कंसंट्रेशन करने में दिक्कत हो।
ऑनलाइन गेम की लत ऐसे छुड़ाएं
बच्चों में गेम की लत को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। इसे अचानक नहीं, बल्कि धीर-धीरे कम करने की कोशिश करें। इसे ऐसे समझें- यदि बच्चा 4 घंटे गेम खेलता है तो उसे पहले 3 घंटे पर सीमित करें। उसके बाद धीरे-धीरे आधा घंटा कम करते जाएं।
बच्चा यदि खाली बैठा है तो उसे कुछ प्रोडक्टिव करना सिखाएं। जैसे- ड्राइंग, पेंटिंग, साइकलिंग, स्पोर्ट्स ,म्यूजिक या स्विमिंग जैसे काम सिखा सकते हैं। इससे बच्चे का ध्यान स्मार्टफोन पर नहीं जाएगा।
भारत में 40 करोड़ हैं गेमर्स
ई-गेमिंग फेडरेशन के अनुसार, भारत में 40 करोड़ से अधिक गेमर्स हैं, जिनमें से लगभग 70% की उम्र 24 वर्ष से कम है। अनुमान है कि करीब 15-20% लोग गेमिंग की लत का शिकार हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने “गेमिंग डिसऑर्डर” को मानसिक बीमारी की श्रेणी में रखा है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF), निमहांस (NIMHANS) और अन्य संस्थानों के अध्ययनों में पाया गया है कि खासकर युवाओं में गेमिंग की लत के मामले बढ़ रहे हैं। जो युवा रोजाना दो घंटे से अधिक समय गेम खेलने में बिताते हैं, उनमें लत का जोखिम अधिक देखा गया है। ये आंकड़े गेमिंग के बढ़ते प्रभाव के बीच जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
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