Social Media: मैसेजिंग एप बन रहे सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द, ऑनलाइन कट्टरपंथ को रोकना बड़ी चुनौती
जनवरी 2024 में, इंटरपोल ने मेटावर्स पर एक श्वेत पत्र (Whitepaper) जारी किया, जिसमें कट्टरपंथ की समस्या पर प्रकाश डाला गया। इसमें उल्लेख किया गया कि आतंकवादी मेटावर्स का उपयोग ऑनलाइन भर्ती, कट्टरपंथ, प्रशिक्षण, और विचारधारा के प्रचार के लिए कर सकते हैं।

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सुरक्षित मैसेजिंग एप्स जैसे सिग्नल, टेलीग्राम, वाइबर और डार्क वेब के अलावा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाले व्हाट्सएप का उपयोग कट्टरपंथी तत्वों द्वारा समान विचारधारा वाले लोगों से जुड़ने के लिए किया जा रहा है। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऑनलाइन कट्टरपंथ को रोकने में एक "बड़ी चुनौती" बन गया है। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि साइबर तकनीक का व्यापक उपयोग कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार के लिए मुख्य उपकरण बन गया है। इसके चलते साइबरस्पेस पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। राज्य पुलिस और NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) द्वारा 67 मामलों की जांच की जा रही है।
इन मामलों में 325 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, 336 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है और 63 आरोपियों को अब तक दोषी ठहराया गया है। साइबर पेट्रोलिंग नियमित रूप से की जा रही है ताकि उन सामग्री और संस्थाओं की पहचान की जा सके जो कमजोर, उदास या अलग-थलग युवाओं को निशाना बना रही हैं।
सरकार ने 2024 में अक्टूबर तक 9,845 URLs (जिसमें कट्टरपंथी सामग्री भी शामिल है) को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को अवैध सामग्री हटाने के लिए "टेक डाउन नोटिस" जारी करने का अधिकार दिया गया है।
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