रील स्क्रॉलिंग बन रही है दिमाग का जंक फूड: याददाश्त हो रही कमजोर, बच्चों से बड़ों तक सब इसके शिकार

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Mon, 11 May 2026 11:55 AM IST
सार

Reels Scrolling Addiction:

घंटों तक रील्स स्क्रॉल करना अब सिर्फ टाइमपास नहीं रह गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आदत धीरे-धीरे आपके दिमाग, ध्यान और रिश्तों पर असर डाल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों में बढ़ती फोन लत के पीछे कई बार माता-पिता खुद सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं।

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स्मार्टफोन एडिक्शन - फोटो : AI जनरेटेड

    विस्तार

    आजकल इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रील्स देखने की आदत तेजी से बढ़ रही है। खासकर बच्चे और युवा घंटों तक स्क्रीन पर स्क्रॉल करते रहते हैं। हालांकि बड़े लोग भी इससे अछूते नहीं हैं। कई बार माता-पिता खुद स्क्रीन टाइम कम नहीं कर पाते और बच्चों के लिए वही आदत एक उदाहरण बन जाती है।

    जंक फूड जैसा है रैंडम रील्स का नशा

    अक्सर हम सोचते हैं कि सिर्फ स्क्रीन टाइम कम कर लेने से बात बन जाएगी, लेकिन असल में आप स्क्रीन पर क्या देख रहे हैं, यह ज्यादा मायने रखता है। न्यूयॉर्क की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया ऐप्स पर बिना सोचे-समझे रैंडम रील्स देखते रहना बिल्कुल 'जंक फूड' खाने जैसा है। जिस तरह जंक फूड शरीर को खराब करता है, वैसे ही इस तरह के कंटेंट की लत आपकी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इसलिए ऐसे एप्स से दूरी बनाना आपकी मानसिक सेहत के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

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    बच्चों में क्यों बढ़ रही है फोन की लत?

    फोन का ज्यादा इस्तेमाल करना और फोन की लत लग जाना, दोनों में बहुत बड़ा फर्क है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के एसोसिएट प्रोफेसर जेसन नागाटा इस एडिक्शन की तुलना नशे की लत से करते हैं।

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    उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अपना ज्यादातर समय सोशल मीडिया पर बिताने लगे, अपने दोस्तों और परिवार से दूरी बनाने लगे या फिर इस आदत का सीधा असर उसकी पढ़ाई और कामकाज पर दिखने लगे, तो यह एक खतरे की घंटी है। यह इस बात का संकेत है कि अब फोन सिर्फ एक जरूरत नहीं रहा, बल्कि एक गंभीर लत बन चुका है जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

    फैमिली मीडिया प्लान बनाने की जरूरत

    बच्चे हमेशा अपने बड़ों की नकल करते हैं। प्रोफेसर जेसन नागाटा के अनुसार, जिन माता-पिता का अपना स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा होता है, उनके बच्चों में भी फोन की लत लगने के चांस सबसे अधिक होते हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए हर घर में एक 'फैमिली मीडिया प्लान' होना चाहिए।

    इसका मतलब है कि परिवार के कुछ सख्त नियम तय किए जाएं, जैसे- खाना खाते समय और सोने से ठीक पहले फोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करना। इसके अलावा, अपने फोन को बेडरूम और डाइनिंग टेबल से दूर रखने की आदत डालें, ताकि परिवार के साथ बिताया गया समय स्क्रीन की भेंट न चढ़ जाए और इस लत पर काबू पाया जा सके।

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