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18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा अधिकमास, जानिए कैसे होती है इसकी गणना और क्या है महत्व
Fri, 18 Sep 2020 06:35 AM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 18 Sep 2020 06:35 AM IST
सार
- मलमास को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।
- पुरुषोत्तम मास में शादी-विवाह, नववधू गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार आदि करना निषेध बताया गया है
- 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा अधिकमास
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अधिकमास 2020: मलमास को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पुरुषोत्तम की आराधना का पर्व मलमास 18 सितंबर से
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भगवान श्रीविष्णु की आराधना के लिए श्रेष्ठ कहे जाने वाले मलमास का आरंभ प्रथम अधिकमास आश्विन शुक्लपक्ष 18 सितंबर से आरंभ हो रहा है जो द्वितीय अधिक मास आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या 16 अक्टूबर तक चलेगा। मलमास को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस मास में प्राणी श्रीहरि विष्णु की आराधना करके अपने जीवन में आने वाली सभी विषम परिस्थितियों, समस्याओं, कार्य बाधाओं, व्यापार में अत्यधिक नुकसान आदि से संकटों से मुक्ति पा सकता है। विद्यार्थियों अथवा प्रतियोगी छात्रों को भी इनकी आराधना से पढ़ाई अथवा परीक्षा में आ रही बाधाओं से छुटकारा मिल सकता है।
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मलमास का महत्व
परमेश्वर श्रीविष्णु द्वारा वरदान प्राप्त मलमास अथवा पुरुषोत्तम मास की अवधि के मध्य श्रीमद्भागवत का पाठ, कथा का श्रवण, श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, श्री राम रक्षास्तोत्र, पुरुष सूक्त का पाठ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ नमो नारायणाय जैसे मंत्रों का जप करके मनुष्य श्री हरि की कृपा का पात्र बनता है। इस मास में निष्काम भाव से किए गए जप-तप पूजा-पाठ ,दान-पुण्य, अनुष्ठान आदि का महत्व सर्वाधिक रहता है। परमार्थ सेवा, असहाय लोगों की मदद करना, बुजुर्गों की सेवा करना, वृद्ध आश्रम में अन्न वस्त्र का दान करना, विद्यार्थियों को पुस्तक का दान कथा संत महात्माओं को धार्मिक ग्रंथों का दान करना, सर्दियों के लिए ऊनी वस्त्र कंबल आदि का दान करना सर्वश्रेष्ठ फलदाई माना गया है। इस मास में किए गए जप-तप, दान पुण्य का लाभ जन्म जन्मांतर तक दान करने वाले के साथ रहता है। लगभग तीन वर्षों के अंतराल में पढ़ने वाले इस महापर्व का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। जिस चन्द्र वर्ष में सूर्य संक्रांति नहीं पड़ती उसे मलमास कहा गया है जिसका सीधा संबंध सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर निर्धारित होता है।
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क्या है अधिमास
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य का सभी बारह राशियों के भ्रमण में जितना समय लगता है उसे सौरवर्ष कहा गया है जिसकी अवधि 365 दिन 6 घंटे और की होती है। इन्हीं राशियों का भ्रमण चंद्रमा प्रत्येक माह करते हैं जिसे चन्द्र मास कहा गया है। चन्द्र एक वर्ष में प्रत्येक राशि का भ्रमण 12 बार करते हैं जिसे चांद्र वर्ष कहा जाता है। चंद्रमा का यह वर्ष 354 दिन और लगभग 09 घंटे का होता है जिसके परिणाम स्वरुप सूर्य और चन्द्र के भ्रमण काल में एक वर्ष में 10 दिन से भी अधिक का समय लगता है। इस तरह सूर्य और चन्द्र के वर्ष का समीकरण ठीक करने के लिए अधिक मास का जन्म हुआ। लगभग तीन वर्ष में ये बचे हुए दिन 31 दिन से भी अधिक होकर अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जाने जाते हैं। कुछ लोग इसे खरमास भी कहते हैं जो सही नहीं है सूर्य के धनु अथवा मीन राशि में गोचर करने की अवधि को ही खरमास कहते हैं, इसलिए मलमास को खरमास न कहें।
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मलमास में क्या न करें
पुरुषोत्तम मास में शादी-विवाह, नववधू, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार आदि करना निषेध बताया गया है किंतु, आपातकाल की स्थिति में सकाम अनुष्ठान, जीवन रक्षक मंत्रों का भी सकाम जप एवं समाज सेवा से संबंधित अन्य सभी उपक्रम किए जा सकते हैं। यदि आपको किसी आवश्यकतावश सकाम अनुष्ठान करना पड़े तो श्री नारायण के चरणों को तुलसी मंजरी तुलसी के पत्तों से पूर्णतः आच्छादित करें। घर के मंदिर में पड़े लड्डू-गोपाल तथा विष्णु जी के अन्य स्वरूप वाली मूर्तियों पर भी तुलसी मंजरी अवश्य अर्पित करें।