Ganeshotsav 2026: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। 10 दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ संपन्न होगा। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इसी दिन हरतालिका तीज का भी संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा में इस्तेमाल बालू की प्रतिमा और पूजन सामग्री का विसर्जन करने के बाद ही गणपति की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। ऐसे में इस बार गणेशोत्सव का पर्व धार्मिक दृष्टि से और भी खास माना जा रहा है।
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Ganeshotsav 2026: कब से शुरू होगा गणेश उत्सव? जानें गणपति स्थापना की तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Sun, 30 Aug 2026 07:20 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Sun, 30 Aug 2026 07:20 AM IST
सार
Ganeshotsav 2026: इस साल गणेश उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से होगी और 10 दिनों तक चलने वाला यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाएगा। खास बात है कि इस दिन हरतालिका तीज का भी संयोग बन रहा है।
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गणेश चतुर्थी 2026
- फोटो : amar ujala
गणेश चतुर्थी 2026
- फोटो : amarujala
गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर 2026, सुबह 05:22 बजे से
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर 2026, सुबह 07:14 बजे तक
गणेश चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त
- फोटो : amarujala
14 सितंबर के प्रमुख शुभ मुहूर्त
- गणपति स्थापना का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:09 से 12:58 बजे तक।
- गणेश पूजा का शुभ समय: सुबह 11:20 से दोपहर 01:48 बजे तक।
- शाम की पूजा का गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:42 से 07:05 बजे तक।
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गणपति स्थापना और पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
- फोटो : freepik
गणपति स्थापना और पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
- चंद्र दर्शन से बचें: धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता। 14 सितंबर को सुबह 09:12 बजे से रात 08:58 बजे तक चंद्र दर्शन न करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर मिथ्या कलंक लग सकता है।
- पूजा की दिशा और चौकी: गणेश जी की नई प्रतिमा को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाना शुभ माना जाता है।
- पूजा सामग्री और भोग: गणपति पूजा में दूर्वा, लाल फूल जैसे गुड़हल, अक्षत और शमी के पत्ते जरूर अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।
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Ganesh Chaturthi
- फोटो : freepik
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें। गंगाजल या शुद्ध जल का छिड़काव करें।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर अक्षत रखें और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- घी या तेल का दीपक प्रज्वलित करके भगवान गणेश और अपने इष्ट देव का ध्यान करें।
- हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए पूजा का संकल्प लें।
- भगवान गणेश का ध्यान करके उनसे सभी विघ्न दूर करने और पूजा सफल बनाने की प्रार्थना करें।
- फूल और अक्षत अर्पित करते हुए भगवान गणेश का विधिवत आवाहन करें।
- गणेश जी को चंदन, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल और दूर्वा अर्पित करें।
- भगवान गणेश के समक्ष धूप और दीप प्रज्वलित करके आराधना करें।
- गणेश जी को मोदक, लड्डू, फल या अन्य सात्त्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें। श्रद्धानुसार गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ भी कर सकते हैं।
- पूजा पूरी होने के बाद परिवार के साथ भगवान गणेश की आरती करें।
- पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए गणपति से क्षमा मांगें और सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- भगवान को चढ़ाया गया प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक वितरित करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।