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पूजा में कौन-सा तिलक लगाना सबसे शुभ? जानें केसर, चंदन और गोरोचन का महत्व

Sat, 29 Aug 2026 10:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 29 Aug 2026 10:24 AM IST
सार

Puja Tilak: पूजा में तिलक लगाना शुभ और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। केसर, चंदन और गोरोचन, तीनों का अपना अलग महत्व है। जानें पूजा के लिए कौन-सा तिलक सबसे शुभ माना जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है।

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Auspicious Tilak for Puja Know the Significance of Kesar, Chandan and Gorochan
puja tilak - फोटो : amar ujala

Puja Tilak Benefits: सनातन धर्म में तिलक लगाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। पूजा-पाठ और शुभ कार्यों में माथे पर तिलक लगाना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। अलग-अलग पूजा और देवी-देवताओं की आराधना में केसर, चंदन, कुमकुम और गोरोचन जैसे तिलकों का प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि तिलक सकारात्मकता और एकाग्रता का प्रतीक है। आइए जानते हैं पूजा और मांगलिक कार्यों में कौन-सा तिलक लगाया जाता है और उसका क्या महत्व माना गया है।

Auspicious Tilak for Puja Know the Significance of Kesar, Chandan and Gorochan
puja tilak - फोटो : adobe stock

तिलक के प्रकार

  • केसर का तिलक: केसर का तिलक शुभता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माथे पर केसर का तिलक लगाने से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति के मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
  • चंदन का तिलक: चंदन का तिलक विशेष रूप से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में लगाया जाता है। चंदन को शीतल माना जाता है, इसलिए धार्मिक मान्यता है कि इसका प्रयोग मन को शांत रखने और पूजा के दौरान ध्यान केंद्रित करने में सहायक होता है।
  • रोली-कुमकुम का तिलक: रोली और कुमकुम का तिलक देवी-देवताओं की पूजा के साथ-साथ शुभ और मांगलिक अवसरों पर भी लगाया जाता है। इसे शक्ति, सौभाग्य, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • अष्टगंध का तिलक: अष्टगंध कई सुगंधित और पवित्र पदार्थों से मिलकर तैयार किया जाता है। धार्मिक परंपराओं में इसे पवित्रता, ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • गोरोचन का तिलक: गोरोचन पारंपरिक रूप से पीले रंग के तिलक के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे शुभता, बुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में इसे देवी-देवताओं को अर्पित करने के बाद माथे पर लगाने की मान्यता है।
  • भस्म या विभूति का तिलक: भगवान शिव की उपासना में भस्म या विभूति का विशेष महत्व है। शिव भक्त इसे अक्सर त्रिपुंड के रूप में माथे पर धारण करते हैं। धार्मिक मान्यता में यह वैराग्य, आत्मचिंतन और संसार की नश्वरता का प्रतीक माना जाता है।
  • गोपी चंदन का तिलक: गोपी चंदन वैष्णव संप्रदाय में विशेष रूप से प्रचलित है। इसे माथे पर सामान्यतः खड़ी रेखाओं के रूप में लगाया जाता है। यह भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
  • सिंदूर का तिलक: सिंदूर का प्रयोग कई धार्मिक परंपराओं में किया जाता है। खासतौर पर भगवान हनुमान और गणेश जी की पूजा में सिंदूर अर्पित करने की परंपरा देखने को मिलती है। इसे शक्ति, साहस और विजय से जोड़कर देखा जाता है।
  • हल्दी का तिलक: हल्दी को सनातन परंपरा में शुभ और पवित्र माना गया है। पूजा-पाठ, विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर हल्दी का तिलक लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह शुभ शुरुआत, समृद्धि और मंगल का प्रतीक है।
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puja tilak - फोटो : adobe stock

तिलक लगाने की सही विधि और नियम

  • तिलक लगाते समय स्वच्छता और पूजा की परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनामिका उंगली से तिलक लगाना शुभ माना जाता है।
  • तर्जनी उंगली के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा का पालन करें।
  • किसी अन्य व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए अंगूठे के इस्तेमाल की परंपरा भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है।
  • पूजा के दौरान पहले भगवान या इष्ट देव को तिलक अर्पित करने और उसके बाद स्वयं तिलक लगाने की परंपरा है।
  • तिलक लगाने से पहले स्नान या हाथ-मुंह की स्वच्छता का ध्यान रखना उचित माना जाता है।

 

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puja tilak - फोटो : adobe stock

तिलक लगाने के धार्मिक और पारंपरिक लाभ
तिलक को सनातन परंपरा में केवल माथे की शोभा बढ़ाने वाला चिह्न नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सकारात्मक भाव का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि माथे पर तिलक लगाने से मन को एकाग्र करने और पूजा के प्रति ध्यान बनाए रखने में मदद मिलती है। अलग-अलग तिलकों को उनके रंग, सामग्री और संबंधित देवी-देवताओं के आधार पर विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। चंदन की शीतलता और अन्य प्राकृतिक पूजा सामग्रियों के पारंपरिक उपयोग के कारण भी तिलक लगाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य संबंधी दावों को धार्मिक मान्यताओं से अलग समझना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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