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राखी बांधने की शुरुआत कैसे हुई?: सबसे पहले किसने बांधा था रक्षा सूत्र, पढ़ें चार पौराणिक कथाएं

Fri, 28 Aug 2026 06:40 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 28 Aug 2026 06:40 AM IST
सार

Raksha Bandhan Stories: रक्षाबंधन पर राखी बांधने की परंपरा से कई रोचक पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। जानिए प्रेम, रक्षा और विश्वास से जुड़ी 4 प्रसिद्ध कथाएं और किसने बांधा था सबसे पहला रक्षा सूत्र।

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Raksha Bandhan 2026 Who Tied the First Raksha Sutra Read 4 Mythological Stories
रक्षाबंधन 2026 - फोटो : amar ujala

Raksha Bandhan Pauranik Kathaein: आज भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन का त्योहार है। रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्यार और विश्वास का त्योहार नहीं, बल्कि इसके पीछे कई रोचक पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। सावन पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस पर्व में बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा का संकल्प लेता है। लेकिन राखी बांधने की यह परंपरा आखिर शुरू कैसे हुई और सबसे पहली राखी किसने बांधी थी? इन सवालों के जवाब कई पौराणिक कथाओं में मिलते हैं। आइए जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी 4 प्रसिद्ध और रोचक कथाएं, जो इस पर्व के महत्व को और भी खास बनाती हैं।

Raksha Bandhan 2026 Who Tied the First Raksha Sutra Read 4 Mythological Stories
रक्षाबंधन 2026 - फोटो : amar ujala

देवासुर संग्राम में इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
पौराणिक मान्यताओं में रक्षाबंधन से जुड़ी एक कथा देवताओं के राजा इंद्र और उनकी पत्नी इंद्राणी से संबंधित है। कहा जाता है कि एक समय देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया था। लगातार संघर्ष के कारण देवताओं की स्थिति कमजोर होने लगी और इंद्र के लिए भी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो गईं। ऐसे समय में इंद्राणी ने भगवान विष्णु की आराधना की। उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ एक पवित्र रक्षा सूत्र तैयार किया और उसे इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इसके बाद इंद्र ने नए आत्मविश्वास और शक्ति के साथ युद्ध किया और देवताओं को विजय प्राप्त हुई। इसी कथा के आधार पर रक्षा सूत्र को संकट के समय सुरक्षा, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है।

Raksha Bandhan 2026 Who Tied the First Raksha Sutra Read 4 Mythological Stories
रक्षाबंधन 2026 - फोटो : amar ujala

यमुना के स्नेह से प्रसन्न हुए यमराज, दिया लंबी आयु का वरदान
रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा सूर्यपुत्री यमुना और उनके भाई यमराज से संबंधित है। मान्यता है कि यमुना अपने भाई यमराज से मिलने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही थीं। एक दिन जब यमराज उनके घर पहुंचे, तो यमुना ने उनका बेहद प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत किया। यमुना ने भाई के लिए पूजा की और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। बहन के इस स्नेह से यमराज बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने यमुना को वरदान दिया कि जो बहन प्रेम और श्रद्धा से अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेगी, उसके भाई को लंबी आयु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होगा। यह कथा भाई-बहन के बीच प्रेम, मंगलकामना और सुरक्षा की भावना को दर्शाती है।

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रक्षाबंधन 2026 - फोटो : amar ujala

भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी ने अपनाया भाई का रिश्ता
रक्षाबंधन की एक प्रसिद्ध कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि को एक वचन दिया था। इसी कारण वे कुछ समय के लिए बलि के राज्य में रहने लगे। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को अपने साथ वापस लाना चाहती थीं। इसके बाद माता लक्ष्मी राजा बलि के पास पहुंचीं और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई मान लिया। राजा बलि ने भी माता लक्ष्मी के इस रिश्ते को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। बहन के रूप में माता लक्ष्मी का सम्मान करते हुए उन्होंने भगवान विष्णु को उनके साथ जाने की अनुमति दे दी। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि रक्षा और अपनत्व का रिश्ता केवल सगे भाई-बहन के बीच ही नहीं होता। प्रेम, विश्वास और सम्मान के आधार पर भी रिश्ते मजबूत हो सकते हैं।

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रक्षाबंधन 2026 - फोटो : amar ujala

द्रौपदी के स्नेह ने कृष्ण से जोड़ा रक्षा का अटूट रिश्ता
रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथाओं में भगवान कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग भी शामिल है। महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी और उससे रक्त निकलने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़ा और कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस छोटे से स्नेह और अपनत्व ने कृष्ण को भावुक कर दिया। उन्होंने द्रौपदी की रक्षा करने का संकल्प लिया। आगे चलकर जब कौरवों की सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ, तब कृष्ण ने उनकी लाज की रक्षा की। यह प्रसंग बताता है कि रक्षा का रिश्ता केवल कलाई पर बांधे गए धागे से नहीं बनता, बल्कि उसके पीछे छिपे प्रेम, विश्वास और समर्पण से मजबूत होता है।

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