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रामनवमी विशेषः 9 लोग जिनके बिना रावण को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता
Fri, 15 Apr 2016 10:40 AM IST
राकेश झा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश झा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 15 Apr 2016 10:40 AM IST
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राम शबरी
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भगवान राम का जन्मदिन चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि रावण के अत्याचार का अंत करने के लिए भगवान विष्णु को राम का अवतार लेना पड़ा। लेकिन राम का अवतार लेने के बाद भी भगवान राम को कई लोगों की सहायता लेनी पड़ी तक जाकर रावण का वध संभव हो पाया। रामनवमी के अवसर पर उन 9 राम भक्तों के बारे में जानिए जिनकी सहायता से राम जी ने रावण का अंत किया।
रामनवमी विशेषः 9 लोग जिनके बिना रावण को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता
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हनुमानजी
हनुमान: राम जी की सहायता करने वालों का जब भी नाम लिया जाता है तो सबसे पहला नाम आता है हनुमान जी का। हनुमान जी ने लंका में देवी सीता की खोज की। इन्होंने राम रावण युद्ध में वानर सेना का नेतृत्व किया और बड़े-बड़े योद्धाओं का संहार किया। हनुमान जी ने रावण की सेना में दहशत पैदा की और उनका मनोबल कम किया।
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राम सु्ग्रीव
सुग्रीव: राम जी के दूसरे सहायक हैं वानरराज सुग्रीव। इन्होंने अपनी सेना के साथ रावण के विरुद्ध युद्ध लड़ने में भगवान राम की सहायता की थी। हनुमान जी इन्हीं के सेनापति थे।
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नल नील
नल-नील: सुग्रीव की सेना में दो वानर थे नल और नील जिन्हें विश्वकर्मा की संतान कहा जाता है। राम रावण युद्ध में नल और नील का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्होंने ही सागर पर पुल बनाकर पूरी सेना को सागर पार कराया था जिससे राम सेना सहित लंका पहुंच पाए।
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राम विभीषण
विभीषण: रावण के भाई विभीषण का योगदान भी कम नहीं था। इन्होंने राम को बताया कि रावण की कमजोरियां क्या है और उनकी शक्ति क्या है। इन्होंने ने ही राम को बताया रावण की नाभि में अमृत कुंड है। नाभि पर वार करने से रावण की मृत्यु हो जाएगी।
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