प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में महादेव की आराधना करने से भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं। सप्ताह के जिस दिन त्रयोदशी पड़ती है, उसी आधार पर प्रदोष का नाम निर्धारित होता है। अक्तूबर का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इसलिए इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
गुरु प्रदोष 2026: कल रखा जाएगा अक्तूबर का पहला प्रदोष व्रत, शिवलिंग पर 5 चीजें चढ़ाने से पूरी होंगी मनोकामनाएं
अक्तूबर का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इसलिए इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
गुरु प्रदोष पर शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें
बेलपत्र:
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। गुरु प्रदोष के दिन साफ और श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इससे मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी प्रार्थना की जाती है।
पीला चंदन:
इस दिन शिवलिंग पर पीले चंदन का लेप करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। पूजा के दौरान शिवलिंग पर आठ स्थानों पर पीला चंदन लगाया जा सकता है।
शहद:
प्रदोष व्रत के अवसर पर शिवलिंग पर शहद अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि महादेव को शहद चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य बढ़ता है और कार्यों में सफलता के मार्ग खुलते हैं।
कच्चा दूध:
शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करना भगवान शिव की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। गुरु प्रदोष के दिन दूध अर्पित करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
पंचामृत:
दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से तैयार पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे श्रद्धा से अर्पित करने से पूजा का विशेष फल मिलने की मान्यता है।
गुरु प्रदोष 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्तूबर की रात 11:16 बजे शुरू होगी और 8 अक्तूबर की रात 10:15 बजे समाप्त होगी। गुरु प्रदोष की पूजा का शुभ समय शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष कहा जाता है। इसे बृहस्पति प्रदोष भी कहते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, धर्म, धन, विवाह और संतान सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का कारक माना गया है। इसलिए गुरु प्रदोष का व्रत विद्यार्थियों और आध्यात्मिक साधना करने वालों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से जीवन के इन क्षेत्रों में उन्नति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
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