पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर, रविवार से होगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। घरों और मंदिरों में देवी आराधना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ देवी भगवती की उपासना का प्रभावी माध्यम माना जाता है। भक्त मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने, मन की शांति और सकारात्मकता की कामना से इसका पाठ करते हैं। आखिर नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2026: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों है खास? जानें धार्मिक महत्व और मान्यता
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की परंपरा है। इसमें मां भगवती की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों किया जाता है और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
क्या है दुर्गा सप्तशती?
दुर्गा सप्तशती को देवी महात्म्य और चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें कुल 13 अध्याय और करीब 700 श्लोक बताए गए हैं। इसी वजह से इसे सप्तशती कहा जाता है। इस ग्रंथ में देवी भगवती की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और असुर शक्तियों के साथ हुए युद्धों का वर्णन मिलता है। इसमें देवी द्वारा अधर्म और आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की कथाएं भी शामिल हैं। नवरात्रि में भक्त इन कथाओं और मंत्रों का पाठ करते हुए मां दुर्गा की आराधना करते हैं।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यता में नवरात्रि को शक्ति की साधना के लिए विशेष समय माना गया है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और दुर्गा सप्तशती में भी देवी की शक्ति और उनके विभिन्न रूपों का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है। भक्त इसे घर में सुख-शांति बनाए रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कामना से भी पढ़ते हैं। कई श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान अपनी मनोकामना की पूर्ति और आध्यात्मिक शांति के लिए नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं। हालांकि, इससे मिलने वाले लाभ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
महिषासुर के वध की कथा भी है शामिल
दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध का विस्तृत वर्णन मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर ने अपनी शक्ति से देवताओं को परेशान कर दिया था। इसके बाद देवी ने उसका सामना किया और उसका वध किया। मां दुर्गा और महिषासुर की यह कथा अच्छाई की बुराई पर और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक मानी जाती है। इसी वजह से नवरात्रि में देवी के शक्ति स्वरूप की आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है। दुर्गा सप्तशती में शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों के साथ देवी के युद्ध का भी वर्णन मिलता है। इन प्रसंगों के जरिए देवी की शक्ति और उनके विभिन्न स्वरूपों की महिमा बताई गई है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से क्या लाभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियम और श्रद्धा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने में सहायक माना जाता है। मान्यता है कि देवी की नियमित आराधना से घर-परिवार में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है। नवरात्रि में कई भक्त किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए भी दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। इस तरह दुर्गा सप्तशती केवल देवी की महिमा का वर्णन करने वाला ग्रंथ ही नहीं, बल्कि नवरात्रि के दौरान शक्ति की आराधना और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा भी मानी जाती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।