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कब है गुरु प्रदोष व्रत 7 या 8 अक्तूबर ? जानिए तिथि, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

Tue, 06 Oct 2026 07:27 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 06 Oct 2026 07:27 PM IST
सार

Guru Pradosh Vrat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान होता है। 

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guru pradosh vrat 2026 date shubh muhurat puja vidhi and importance
प्रदोष व्रत 2026 - फोटो : AI

विस्तार

हिंदू धर्म में हर एक तिथि का विशेष महत्व होता है, जिसमें त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान भोलेभंडारी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना करने का विधान होता है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। गुरु प्रदोष व्रत पर प्रदोषकाल में शिवलिंग की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं प्रदोष तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त। 

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गुरु प्रदोष व्रत तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत, 7 अक्तूबर 2026 को रात 11 बजकर 16 मिनट पर होगी और इसका समापन 8 अक्तूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 15 मिनट पर होगी। 
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गुरु प्रदोष पूजा शुभ मुहूर्त 2026
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस तरह से पूजा की कुल अवधि 2 घंटे 28 मिनट तक रहेगी। 

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि
गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुधरे वस्त्र धारण करें,फिर इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत रखने और पूजा करने का संकल्प लें। शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। ऐसे में इस दिन प्रदोष काल में शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। फिर शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी से अभिषेक करें। शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद बेलपत्र, धतूरा, फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें। पूजा के दौरान लगातार ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और अंत में आरती, प्रदोष व्रत कथा और शिव चालीसा का पाठ करें। 
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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