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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Navratri 2025 Importance of Shree Harsiddhi Mata Shaktipeeth Temple

Navratri 2025: उज्जैन का हरसिद्धि माता शक्तिपीठ, जहां भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी

Tue, 23 Sep 2025 06:25 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 23 Sep 2025 06:25 PM IST
सार

मां शक्ति के 51 शक्तिपीठ हैं, जिनमें से एक है उज्जैन स्थित हरसिद्धि माता मंदिर। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की आस्था और भक्ति से जुड़ी अनगिनत कहानियां भी इसे विशेष बनाती हैं।

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Navratri 2025 Importance of Shree Harsiddhi Mata Shaktipeeth Temple
हरसिद्धि माता मंदिर, मध्य प्रदेश - फोटो : instagram

विस्तार

भारत की धरती पर शक्ति की उपासना का अपना विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ शक्ति के 51 शक्तिपीठ हैं, जिनमें से एक है उज्जैन स्थित हरसिद्धि माता मंदिर। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की आस्था और भक्ति से जुड़ी अनगिनत कहानियाँ भी इसे विशेष बनाती हैं। शिप्रा तट पर बसे इस मंदिर में हर समय श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है, लेकिन शारदीय नवरात्र के दौरान यहाँ का वातावरण अद्भुत और अलौकिक हो जाता है।
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पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के शव को लेकर पूरे ब्रह्मांड में विचरण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के अंगों को काटकर गिराया। जहाँ-जहाँ माँ सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई। उज्जैन का यह हरसिद्धि माता मंदिर भी उन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ माँ सती का कोहनी (अंग) गिरा था, जिसके कारण यह स्थान शक्ति उपासना का महत्त्वपूर्ण केंद्र बना।
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मंदिर का महत्व और स्वरूप
हरसिद्धि माता मंदिर प्राचीन स्थापत्य का सुंदर उदाहरण है। गर्भगृह में विराजमान माँ हरसिद्धि की प्रतिमा अत्यंत भव्य और दिव्य है। इनके साथ अन्नपूर्णा माता और महालक्ष्मी की प्रतिमाएँ भी विराजित हैं। मंदिर परिसर में स्थित दो विशाल दीप स्तंभ इसकी शोभा को और बढ़ाते हैं। नवरात्रि के अवसर पर जब इन दीप स्तंभों में सैकड़ों दीपक प्रज्वलित होते हैं, तो दृश्य स्वर्गिक प्रतीत होता है। यह भी मान्यता है कि उज्जैन नगरी की रक्षा मां हरसिद्धि स्वयं करती हैं। विक्रमादित्य और अन्य प्राचीन शासकों ने इस मंदिर में विशेष श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की थी। कहते हैं कि राजा विक्रमादित्य ने मां हरसिद्धि की आराधना करके ही अद्वितीय पराक्रम प्राप्त किया था।
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नवरात्रि में विशेष पूजा
नवरात्रि के दिनों में हरसिद्धि माता मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। इन नौ दिनों में भक्त सुबह-शाम विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ, और माता को भोग अर्पण करते हैं। गरबा और दुर्गा आरती की गूँज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यहाँ पर विशेष रूप से कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है और हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर मंदिर दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


मंदिर में इन दिनों विशेष श्रृंगार किया जाता है। मां हरसिद्धि को लाल वस्त्र, स्वर्णाभूषण और फूलों से सजाया जाता है। भव्य आरती और दीप प्रज्वलन से सारा परिसर आलोकित हो उठता है। ऐसा विश्वास है कि नवरात्रि में हरसिद्धि माता की पूजा-अर्चना करने से साधक को शक्ति, धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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धार्मिक आस्था
स्थानीय लोगों का मानना है कि माँ हरसिद्धि भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। व्यापार में उन्नति, पारिवारिक सुख, संतान सुख और जीवन के संकटों से मुक्ति के लिए भक्त यहाँ आकर नतमस्तक होते हैं। यह भी कहा जाता है कि उज्जैन की महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक भक्त हरसिद्धि माता के दर्शन न कर लें। 


 
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