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Navratri 2025 Day 3: नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित, जानें प्रिय भोग, आरती और मंत्र

Wed, 24 Sep 2025 11:31 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 24 Sep 2025 11:31 AM IST
सार

नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माता रानी का यह रूप शांति, साहस और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं नवरात्रि के तीसरे दिन के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और कथा।

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Navratri Day 3 Maa Chandraghanta Puja Vidhi Bhog and Mantra in Hindi Maa Chandraghanta Arti
नवरात्रि का तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा - फोटो : Amar Ujala

Navratri Day 3 Maa Chandraghanta Puja: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माता रानी का यह रूप शांति, साहस और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा बाघ पर सवार होती हैं, जिनका तेजस्वी रूप भक्तों को निर्भय बनाता है, वहीं उनका सौम्य स्वरूप शांति और सुख प्रदान करता है।


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मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा के गले में सुगंधित सफेद फूलों की माला शोभायमान रहती है और वे बाघ पर सवार होती हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र विराजमान है, जिस कारण उन्हें "चंद्रघंटा" कहा जाता है। मां चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं, जिनमें वे कमल, धनुष-बाण, खड्ग, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा सहित कई अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए हैं। इनकी उपासना करने से भय दूर होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति भी सुदृढ़ होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के तीसरे दिन के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और कथा।

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नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की अराधना - फोटो : Amar Ujala

पूजा विधि

  • नवरात्रि के तीसरे दिन प्रातः काल उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, पवित्र वस्त्र पहनें।
  • मां चंद्रघंटा की प्रतिमा को पूजास्थल पर रखें और श्रद्धा के साथ उनकी आराधना आरंभ करें। 
  • पूजन के समय उन्हें लाल और पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
  • मां को कुमकुम, पुष्प और अक्षत समर्पित करें और पीले और लाल रंग के फूल चढ़ाएं।
  • दीपक और धूप जलाकर मां चंद्रघंटा की आरती करें। 
  • नियमपूर्वक पूजा करने से मां चंद्रघंटा प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

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मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग - फोटो : Amar Ujala

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
मां चंद्रघंटा की पूजा में खीर का भोग अर्पित किया जाता है। मां को विशेष रूप से केसर की खीर प्रिय है। इसके अलावा लौंग, इलायची, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाइयों का भो भोग लगा सकते हैं। मां चंद्रघंटा को गाय के दूध का भोग लगाने से दुखों से मुक्ति मिलती है।
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मां चंद्रघंटा की व्रत कथा - फोटो : Amar Ujala

मां चंद्रघंटा की व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब असुरराज महिषासुर ने तीनों लोकों में अत्याचार शुरू कर दिया और स्वर्गलोक पर अधिकार करने की ठान ली, तब सभी देवता भयभीत होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे। देवताओं की व्यथा सुनकर तीनों देव अत्यंत क्रोधित हो उठे। उनके तेज और ऊर्जा के सम्मिलन से एक दिव्य देवी का प्राकट्य हुआ।

इस देवी को सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र प्रदान किए, भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र, इंद्रदेव ने घंटा, सूर्यदेव ने अपना प्रकाश और अन्य देवताओं ने भी अपने-अपने शस्त्र सौंप दिए। इन दिव्य शक्तियों से संपन्न होकर मां चंद्रघंटा ने महिषासुर से युद्ध किया और उसका वध कर दिया। देवताओं ने उनके इस पराक्रम के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। इस प्रकार मां चंद्रघंटा ने देवताओं और समस्त लोकों को महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाई।

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मां चंद्रघंटा की आरती - फोटो : Amar Ujala

मां चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।

कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।

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