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Makar Sankranti: इस बार दो शुभ योग, करिए ये काम, मंगलकारी होंगे परिणाम
Wed, 15 Jan 2020 11:11 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 15 Jan 2020 11:11 AM IST
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Makar Sankranti
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मकर संक्रांति पर आगरा के बाजारों में पतंग और गजक की दुकानें सज गई हैं। 14 जनवरी की रात दो बजकर 21 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस कारण सूर्योदय व्यापिनी तिथि में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति पर सूर्य और बुध एक साथ होने से बुधादित्य योग बन रहा है। इसके अलावा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होने से वर्धमान नाम का एक शुभ योग भी इस दिन रहेगा। आगरा के बटेश्वर में मकर संक्रांति पर स्नान और दर्शन के साथ अनुष्ठान भी होंगे।
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इनका है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर ने बताया कि दो शुभ योग का परिणाम मंगलकारी होते हैं। इस दिन तीर्थ स्नान, दान, जाप, हवन, तुलादान, गोदान, स्वर्ण दान का विशेष महत्व है। गरीबों को कंबल, ब्राह्मणों को खिचड़ी एवं तिल गुड़ का पात्र भरकर दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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मकर संक्रांति पर सूर्य और बुध एक साथ होने से बुधादित्य योग बन रहा है। इसके अलावा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होने से वर्धमान नाम का एक शुभ योग भी इस दिन रहेगा। आगरा के बटेश्वर में मकर संक्रांति पर स्नान और दर्शन के साथ अनुष्ठान भी होंगे।
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इनका है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर ने बताया कि दो शुभ योग का परिणाम मंगलकारी होते हैं। इस दिन तीर्थ स्नान, दान, जाप, हवन, तुलादान, गोदान, स्वर्ण दान का विशेष महत्व है। गरीबों को कंबल, ब्राह्मणों को खिचड़ी एवं तिल गुड़ का पात्र भरकर दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
स्नान के पूर्व शरीर पर तिल का उबटन लगाकर स्नान करने से आरोग्य की वृद्धि होती है। बटेश्वर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि मकर संक्रांति पर बन रहे दो शुभ योग की वजह से बटेश्वर में धार्मिक अनुष्ठान के लिए भक्त अभी से पहुंचने लगे है। स्नान, दान, पुण्य के पर्व की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
शुभ कार्य होंगे प्रारंभ
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण से ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर गए थे। इसी दिन भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था।
इसलिए पवित्र नदियों और गंगासागर में स्नान का अत्यधिक महत्व है। इसी दिन से देवताओं के दिनों का प्रारंभ हो जाता है। मलमास समाप्त हो जाता है। विवाह आदि शुभकार्य शुरू हो जाते हैं।
शुभ कार्य होंगे प्रारंभ
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण से ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर गए थे। इसी दिन भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था।
इसलिए पवित्र नदियों और गंगासागर में स्नान का अत्यधिक महत्व है। इसी दिन से देवताओं के दिनों का प्रारंभ हो जाता है। मलमास समाप्त हो जाता है। विवाह आदि शुभकार्य शुरू हो जाते हैं।