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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Bhadrapada Purnima Stotra Lyrics In Hindi Sri Hari Stotram And Sri Satyanarayanashtakam Stotra

Bhadrapada Purnima Stotra Lyrics: भाद्रपद पूर्णिमा पर करें इस स्तोत्र का पाठ, जीवन में आएगी समृद्धि

Thu, 04 Sep 2025 02:56 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Thu, 04 Sep 2025 02:56 PM IST
सार

भाद्रपद पूर्णिमा पर सुबह स्नान करके दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही श्री हरि स्तोत्रम् और श्रीसत्यनारायणाष्टकम् स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। 

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Bhadrapada Purnima Stotra Lyrics In Hindi Sri Hari Stotram And Sri Satyanarayanashtakam Stotra
भाद्रपद पूर्णिमा स्तोत्र गीत - फोटो : adobe stock

विस्तार

Bhadrapada Purnima Stotra Lyrics: इस साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि 7 सितंबर, रविवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन स्नान और दान करने का बड़ा महत्व है। इससे पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के स्वरूप श्री सत्यनारायण की विशेष पूजा का महत्व है। इस अवसर पर व्रत रखा जाता है और श्रद्धा से सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि कथा सुनने और कराने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

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इस दिन सुबह स्नान करके दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही श्री हरि स्तोत्रम् और श्रीसत्यनारायणाष्टकम् स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है तथा भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। श्री हरि स्तोत्रम् कुछ इस प्रकार है।

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श्री हरि स्तोत्रम्
जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालंशरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
नभोनीलकायं दुरावारमायंसुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं॥
सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासंजगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रंहसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं॥
रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारंजलान्तर्विहारं धराभारहारं
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपंध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं॥
जराजन्महीनं परानन्दपीनंसमाधानलीनं सदैवानवीनं
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुंत्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं॥
कृताम्नायगानं खगाधीशयानंविमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलंनिरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं॥
समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशंजगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहंसुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं॥
सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठंगुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
सदा युद्धधीरं महावीरवीरंमहाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं॥
रमावामभागं तलानग्रनागंकृताधीनयागं गतारागरागं
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतंगुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं॥

फलश्रुति
इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तंपठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकंजराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो॥

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श्रीसत्यनारायणाष्टकम् स्तोत्र
आदिदेवं जगत्कारणं श्रीधरं लोकनाथं विभुं व्यापकं शंकरम्।
सर्वभक्तेष्टदं मुक्तिदं माधवं सत्यनारायणं विष्णुमीशम्भजे॥
सर्वदा लोककल्याणपारायणं देवगोविप्ररक्षार्थसद्विग्रहम्।
दीनहीनात्मभक्ताश्रयं सुन्दरम् श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
दक्षिणे यस्य गंगा शुभा शोभते राजते सा रमा यस्य वामे सदा।
यः प्रसन्नाननो भाति भव्यश्च तं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
संकटे संगरे यं जनः सर्वदा स्वात्मभीनाशनाय स्मरेत् पीडितः।
पूर्णकृत्यो भवेद् यत्प्रसादाच्च तं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
वाञ्छितं दुर्लभं यो ददाति प्रभुः साधवे स्वात्मभक्ताय भक्तिप्रियः।
सर्वभूताश्रयं तं हि विश्वम्भरं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
ब्राह्मणः साधुवैश्यश्च तुंगध्वजो येऽभवन् विश्रुता यस्य भक्त्यामराः।
लीलया यस्य विश्वं ततं तं विभुं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
येन चाब्रम्हाबालतृणं धार्यते सृज्यते पाल्यते सर्वमेतज्जगत्।
भक्तभावप्रियं श्रीदयासागरं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
सर्वकामप्रदं सर्वदा सत्प्रियं वन्दितं देववृन्दैर्मुनीन्द्रार्चितम्।
पुत्रपौत्रादिसर्वेष्टदं शाश्वतं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
अष्टकं सत्यदेवस्य भक्त्या नरः भावयुक्तो मुदा यस्त्रिसन्ध्यं पठेत्।
तस्य नश्यन्ति पापानि तेनाग्निना इन्धनानीव शुष्काणि सर्वाणि वै॥
…श्रीसत्यनारायणाष्टकम् सम्पूर्णम्…


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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