{"_id":"64ccfec132a0cff479049f3f","slug":"yashwant-singh-parmar-jayanti-celebrated-in-himachal-pradesh-vidhan-sabha-2023-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Himachal News: पठानिया बोले- डॉ. परमार का हिमाचल बनाने में बहुत बड़ा योगदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Himachal News: पठानिया बोले- डॉ. परमार का हिमाचल बनाने में बहुत बड़ा योगदान
Fri, 04 Aug 2023 07:06 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 04 Aug 2023 07:06 PM IST
सार
उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 1994 से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पुस्तकालय में परमार जयंती मनाई जा रही है और आज उनकी 117वीं जयंती पर सब उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में राज्य स्तरीय समारोह।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में हिमाचल निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय डॉ. यशवंत सिंह परमार की 117वीं जयंती पर राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। पठानिया ने कहा कि डॉ. यशवंत सिंह परमार वर्तमान हिमाचल के स्वरूप के संस्थापक थे। आज का हिमाचल बनाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। पठानिया ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 9 माह में ही 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल बन गया।
विज्ञापन
इसके अतिरिक्त पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों को हिमाचल में सम्मिलित करने और 25 जनवरी 1971 को हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. परमार ने अपना जीवन लोगों की सेवा में समर्पित किया। उन्हीं के प्रयासों से हिमाचल आज इस मुकाम पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हमें इस प्रदेश को सामाजिक सद्भाव के साथ आगे बढ़ाना है और यही परमार को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार सबके नेता थे।
विज्ञापन
उन्होंने उस दौर में पैदल ही प्रदेश के कोने-कोने का प्रवास किया। डॉ. परमार कहते थे कि सड़कें हमारी भाग्य रेखाएं और उनकी इस सोच को सार्थक करते हुए आज प्रदेश की हर पंचायत सड़क सुविधा से जुड़ी है। इसके अतिरिक्त डॉ परमार की सोच विकास के साथ-साथ प्रदेश के वनों के संरक्षण की भी थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विकास में सभी मुख्यमंत्रियों ने अपना योगदान दिया है। प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. परमार के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन
उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 1994 से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पुस्तकालय में परमार जयंती मनाई जा रही है और आज उनकी 117वीं जयंती पर सब उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। परमार ने ही आदर्श राज्य की शुरुआत की थी। उन्होंने पझौता आंदोलन की शुरुआत की और आगे चलकर प्रथम मुख्यमंत्री बनकर इस पहाड़ी प्रदेश का नेतृत्व किया। कार्यक्रम में डॉ. यशवंत सिंह परमार के पौत्र आनंद परमार और प्रपौत्र यशस्वी सिंह परमार को कुलदीप सिंह पठानिया ने सम्मानित किया।
इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से डॉ. परमार पर तैयार वृत्तचित्र का भी प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लोक निर्माण, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री विक्रमादित्य सिंह, मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्राक्टा, आशीष बुटेल, किशोरी लाल, संजय अवस्थी, लोकायुक्त चंद्र भूषण बरोवालिया, विभिन्न विधायक, महापौर नगर निगम शिमला सुरेंद्र चौहान, उपमहापौर उमा कौशल मौजूद रहे।
कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में मनाई परमार जयंती
हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की 117वीं जयंती पर शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में पार्टी नेताओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश के निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान को याद किया। कहा कि डॉ. परमार की बदौलत ही प्रदेश अस्तित्व में आया। डॉ. परमार की दूरदृष्टि, कूटनीति का ही परिणाम है जो आज हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्यों में अग्रणी माना जाता है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में जन्मे डॉ. परमार विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने वकालत में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर प्रदेश के हितों का सरंक्षण किया। इस मौके पर पूर्व विधायक आदर्श सूद, चिरंजी लाल कश्यप, अमित नंदा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैनब चंदेल, कुसुम्पटी ब्लॉक अध्यक्ष राम कृष्ण शांडिल, डॉ. मस्त शर्मा, भूपेंद्र कंवर, एसएस जोगटा, वीरेंद्र जसवाल, बलदेव ठाकुर, मोहन नेगी, यशपाल सिंह, बनिता वर्मा, कमलेश ठाकुर, उमा मुदर्याल, वृंदा सिंह, वीर सिंह, सतपाल, जीतराम पंवर आदि मौजूद रहे।