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पढ़ें, यमन में डरावने हमले की कहानी, अफसर की जुबानी

Wed, 15 Apr 2015 11:49 PM IST
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:49 PM IST
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yaman attack, navy officer reveal dreadfull facts.

यमन में मौत के मुंह से बचकर निकले मंजीत सिंह के साथी अमरजीत सिंह ने बुधवार को अमर उजाला से बातचीत में दर्द की दास्तां बयां की। अमरजीत बुधवार को हिमाचल स्थित चंबोह गांव में मंजीत के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे। अमरजीत पंजाब के मुकेरियां के रहने वाले हैं। अमरजीत भी मर्चेंट नेवी अफसर हैं और मुंबई से मंजीत सिंह के साथ हवाई मार्ग से यमन गए थे।

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यमन में हमले के वक्त दोनों एक ही कंपनी के शिप में सवार थे। अमरजीत सिंह ने बताया कि वे दोनों 24 मार्च को मुंबई से फ्लाइट लेकर यमन गए थे। जिस कंपनी में वह तैनात था, उसका शिप गल्फ डव यमन में ही था। शिप के इंजन में टेक्निकल खराबी थी। इंजन का काम चल रहा था। 9 मार्च सुबह दस बजे विद्रोही संगठन ने टैंकों से गोलाबारी शुरू कर दी और गोले शिप के पास पानी में गिरने लगे।
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कैप्टन ने आदेश दिया कि शिप से बाहर निकलकर पुलिस की ओर जाकर छिप जाओ। शिप में आठ अफसर थे। सभी शिप से बाहर निकलकर जान बचाने के लिए भागे। लेकिन पुलिस की ओर भागते हुए टैंक से निकला गोला मंजीत के पास गिर गया और मंजीत गंभीर घायल हो गया। घायल मंजीत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल में मंजीत ने दम तोड़ दिया।

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मंजीत का शव देखकर फफक पड़ा चंबोह गांव

yaman attack, navy officer reveal dreadfull facts.

यमन में 9 मार्च को गोलीबारी का शिकार हुए भोरंज के मर्चेंट नेवी अफसर मंजीत सिंह का शव सात दिन बाद बुधवार सुबह पांच बजे उनके पैतृक गांव चंबोह पहुंचा। करीब आठ बजे गांव के एक श्मशानघाट में मंजीत का अंतिम संस्कार किया गया। मंजीत की दो छोटी बेटियां हैं। बड़ी की उम्र तीन वर्ष जबकि छोटी बेटी की उम्र महज सात माह है।

लिहाजा, मंजीत के बड़े भाई प्रवीण कुमार के बेटे प्रशांत ठाकुर ने चाचा की चिता को मुखाग्नि दी। मंजीत की शव यात्रा में भोरंज सदर के विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री आईडी धीमान, एसडीएम राकेश शर्मा, तहसीलदार संजय कुमार, एसएचओ भोरंज मुकेश कुमार, अवाहदेवी चौकी प्रभारी शांति स्वरूप, एपीएमसी के अध्यक्ष प्रेम कौशल समेत उपमंडल भोरंज के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री की ओर से एसडीएम राकेश शर्मा और उपायुक्त हमीरपुर की ओर से तहसीलदार ने श्रद्धांजलि दी।

मंजीत की 9 मार्च को हुई थी मौत

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मर्चेंट नेवी अफसर मंजीत सिंह (28) पुत्र प्रकाश चंद गांव चंबोह उपमंडल भोरंज हमीरपुर का रहने वाला था। वह मार्च माह के पहले हफ्ते ही मुंबई से एक प्राइवेट शिप में सवार होकर यमन गया था। यहां पहले से जारी विद्रोह और संघर्ष में गोलाबारी में मंजीत की मौत हो गई। इसके बाद मंजीत के शव को पहले यमन से जिबूती और बाद में जिबूती से दिल्ली लाया गया।

हिमाचल के असिस्टेंट रेजिडेंट कमिश्नर हिमांशु शेखर चौधरी, तहसीलदार भोरंज संजय कुमार, पुलिस उपनिरीक्षक जय चंद, बड़ा भाई प्रवीण कुमार, मामा राकेश कुमार, साला अमित कुमार और दोस्त विनोद कुमार मंगलवार सायं पांच बजे मंजीत के शव को हमीरपुर लेकर आए।

बेटियों को नहीं पता, पापा को क्या हो गया
मंजीत सिंह का शव घर पहुंचते ही पत्नी दिप्ती, माता और पिता सहित परिवार के अन्य सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। बुधवार तड़के मंजीत की मां और पत्नी के रोने की आवाजें सुनकर आस पड़ोस के लोग इकट्ठे हो गए। लोगों ने परिवार को संभाला। बेटियों को तो यह भी पता नहीं कि उनके पापा को क्या हो गया है।

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