उद्योगपति की ये करतूत पढ़ना नहीं चाहेंगे आप!
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औद्योगिक नगर बद्दी में दिल्ली के एक उद्योगपति ने हिमाचल आबकारी एवं कराधान विभाग का पंजीकृत डीलर बनकर सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा कर डाला है।
प्रदेश के कई हिस्सों में बसे उद्योगों के नाम पर फर्जी बिल काटकर शातिर अन्य उद्योगपतियों को बांटता रहा। उसी के दम पर कारोबारी आईटीसी का लाभ लेता रहा और सरकार के करोड़ों रुपये हड़प गया।
जब आबकारी एवं कराधान विभाग की टीम ने उसके कार्यालय में दबिश दी तो वह चंपत हो गया। आबकारी एवं कराधान विभाग ने बद्दी पुलिस के एसपी जी. शिवा को मामले में भादंसं की धारा 420, 463, 467 और 477 ए के तहत मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की है।
प्रदेश में पहला आईटीसी स्कैम
दावा है कि मूल्य वर्धित कर लागू होने के बाद प्रदेश में इस तरह का यह पहला मामला है, जब विभाग ने एक डीलर पर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त उड़नदस्ता दक्षिण क्षेत्र डा. सुनील कुमार ने इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है।
जांच प्रभावित न हो, इसके लिए नाम गुप्त रखे जा रहे हैं। बद्दी के मार्केटिंग बोर्ड के कार्यालय परिसर में शातिर ने दीप इंटरप्राइजेज ऑफिस खोल रखा था। सूचना के मुताबिक शातिर पूरा बिजनेस यहीं से हैंडल कर रहा था।
कई कंपनियों के नाम आएंगे सामने
शातिर आईटीसी के नाम पर सरकार को चूना लगाता रहा। टैक्स से बचने वालों उद्योगपतियों से इसने हाथ मिलाया। फर्मों के फर्जी बिल जनरेट किए और उन कारोबारियों को उसी बिल के आधार पर फर्जी सामान बेचने के बिल काट दिए और उनसे आईटीसी का लाभ लिया।
करोड़ों का फर्जीवाड़ा
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त डा. सुनील के मुताबिक फर्जीवाड़ा करोड़ों का है। अब तक 1.26 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी है। यह मामला 50 करोड़ से अधिक तक पहुंच सकता है। आईटीसी का अपनी तरह का यह पहला फर्जीवाड़ा है, जिसपर एफआईआर दर्ज होगी।
हमीरपुर का नाम आया सामने
शातिर ने हमीरपुर की एक कंपनी से भारी भरकम खरीद दिखाई है। जब आबकारी एवं कराधान विभाग की टीम मौके पर पहु़ंची तो जांच के बाद वह भी खुद हैरत में पड़ गई। संबंधित कंपनी से कोई भी खरीदारी शातिर ने नहीं की है।