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ग्लोबल वार्मिंग से बचाएगी प्राकृतिक खेती: सुभाष पालेकर

Wed, 05 Jun 2019 06:59 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पालमपुर (कांगड़ा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: Krishan Singh Updated Wed, 05 Jun 2019 06:59 PM IST
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world environment day 2019: padmashri awardi subhash palekar statement on global warming in kangra
- फोटो : अमर उजाला

प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत कृषि विवि पालमपुर में छह दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। इसका शुभारंभ राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती के माहिर पद्मश्री सुभाष पालेकर के साथ किया।

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सुभाष पालेकर ने कहा कि आज विश्व भर में पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। विश्व के सामने ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बनी हुई है और अन्य क्षेत्रों के साथ कृषि क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग में अहम भूमिका निभा रहा है। 
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रासायनिक खेती और जैविक कृषि में प्रयोग होने वाली खाद, कीटनाशक और अन्य आदान ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग से बचने के लिए केवल एकमात्र विकल्प प्राकृतिक खेती है।
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हिमाचल के साथ देश के कई राज्यों में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती का प्रसार बड़ी तेजी से हो रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक हुई है, जिसमें कृषि विश्वविद्यालयों में प्राकृतिक खेती को सिलेबस के रूप में शामिल करने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि आज कैंसर और हृदय घात जैसे खतरनाक बीमारियों का कारण रसायनिक और जैविक खेती है और इसका विकल्प तलाशना अब जरूरी हो गया है। प्राकृतिक खेती से बड़ा कोई विकल्प नहीं है। 

देश को प्राकृतिक खेती वाले किसान की जरूरत: राज्यपाल

 राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसानों को अब अपने बेहतर जीवन के लिए प्राकृतिक खेती ईमानदारी से अपनाएं, ताकि आने वाले दिनों में उनका जीवन रोग मुक्त रहे।

उन्होंने कहा कि इस खेती विधि को अपनाने से किसानों की आय में वृद्धि तो होगी ही, साथ ही लोगों को जहर मुक्त अनाज मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मनुष्यों में अनेकों बीमारियां आ रही हैं। 

लोगों को जहर मुक्त और पोषण युक्त खाद्यान मुहैया करवाने के लिए किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज लोगों को फैमिली डॉक्टर रखने की जरुरत नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक खेती करने वाले किसान की जरूरत होनी चाहिए, ताकि उसके जीवन में बीमारी कोई घर ही न कर सके ।

लोगों को एक देशी गाय रखनी होगी, जिससे उसके गोबर और मूत्र से प्राकृतिक खेती हो सके। उन्होंने प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञ सुभाष पालेकर का आभार जताते हुए कहा कि वह हिमाचल को प्राकृतिक खेती के लिए अपना अधिक समय दे रहे हैं। इससे पहले कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि  सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को एक जन आंदोलन के रूप में लोगों के बीच ले जाया जाएगा। 

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