Women MLA Training Camp: धर्मशाला में महिला विधायकों ने फिल्म देखकर सीखा सही फैसला लेने का कौशल
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के एक निजी होटल में चल रहे महिला विधायकों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘सशक्त महिला नेतृत्व से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के उपाय’ विषय पर चर्चा की गई।
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महिला विधायकों ने ‘एक रुका हुआ फैसला’ फिल्म देखकर सही फैसला लेने का कौशल सीखा। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के एक निजी होटल में चल रहे महिला विधायकों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘सशक्त महिला नेतृत्व से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के उपाय’ विषय पर चर्चा की गई। शुक्रवार को यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न होगा। दूसरे दिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की 28 महिला विधायक कार्यक्रम में मौजूद रहीं। दूसरों को प्रभावित करने के तौर-तरीकों पर आधारित एक सत्र में महिला विधायकों को ‘एक रुका हुआ फैसला’ फिल्म दिखाई गई।
फिल्म के जरिये उन्हें अपने राजनीतिक एवं निजी जीवन में विवेकपूर्ण और तार्किक फैसले लेने का कौशल सिखाया गया। उन्हें बताया गया कि प्रेरणादायी अपील, सहयोग और परामर्श राजनीतिक जीवन में बढ़त दिला सकते हैं। दबाव और गठबंधन निर्माण जैसे अनुचित तरीके न अपनाने की नसीहत भी दी गई। फिल्म में निर्णायक मंडल के 12 सदस्य खून के मुकदमे पर जमकर चर्चा करते हैं। शुरुआत में केवल एक सदस्य आश्वस्त होता है कि युवक अपराध के लिए दोषी नहीं है। अपने-अपने तर्क देकर अंत में सभी सदस्य युवक को निर्दोष मान लेते हैं। राजनीति में सक्रिय लोगों को भी ऐसे ही तर्कों के जरिये सही फैसला लेने का मंत्र दिया।
कार्यशाला के दूसरे दिन ‘नैरोइंग दि गैप इन दि नेगोसिएशन’ सत्र से शुरुआत हुई। वहीं, दिन के अंतिम सत्र में महिला विधायकों को बताया गया कि वे किस तरह संगठन और समाज में नियमित रूप से फीडबैक लेकर अपनी नेतृत्व क्षमताओं को निखार सकते हैं। विशेषज्ञ के तौर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट रायपुर के निदेशक राम कुमार काकानी ने इफेक्टिव लीडरशिप विषय पर अपना संबोधन दिया। ‘शी इज ए चेंज मेकर’ अभियान के तहत तीन दिवसीय महिला विधायकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न होगा।
हॉलीवुड फिल्म पर आधारित है ‘एक रुका हुआ फैसला’
वर्ष 1954 में रेगिनेल्ड रोज ने अमेरिकी टेलीविजन के लिए एक नाटक लिखा था। वर्ष 1957 में सिडनी ल्यूमेट ने इस नाटक के आधार पर ‘12 एंग्री मैन’ शीर्षक से हॉलीवुड फिल्म बनाई। उस फिल्म में नायक हेनरी फोंडा ने 11 लोगों की विरोधी दलीलों का सामना करते हुए पिता की हत्या के आरोपी युवक को निर्दोष साबित किया था। अस्सी के दशक में रंजीत कपूर ने उसी अंग्रेजी नाटक का हिंदी में रूपांतरण करके ‘एक रुका हुआ फैसला’ नाटक लिखा। उन्होंने इस नाटक का मंचन देश भर में किया। इसके बाद बासु चटर्जी ने रंजीत कपूर से उनके नाटक पर फिल्म बनाने की स्वीकृति लेकर 1986 में फिल्म बनाई। इस फिल्म में न हीरो था, न हीरोइन थी। सवा घंटे की इस फिल्म में हत्या के एक मुकदमे में अदालत की ओर से बनाई गई समिति के 12 लोग हैं, जो एक कमरे में बैठकर एक युवक के दोषी होने या निर्दोष होने पर जिरह करते हैं। अंत में युवक को निर्दोष साबित किया जाता है।