शीत सत्र: इन मुद्दों पर सदन में होगा जमकर हंगामा
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हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र का हश्र मानसून सत्र से जुदा होगा, इसकी उम्मीद कम ही है। कांग्रेस सरकार पेट्रो पदार्थों पर वैट बढ़ाकर सत्र में आ रही है और यही विपक्षी दल भाजपा का सबसे बड़ा मुद्दा होगा। मोदी लहर पर सवार विपक्ष का कहना है कि पेट्रो पदार्थों पर टैक्स बढ़ाकर वीरभद्र सरकार केंद्र सरकार के अच्छे दिनों में रोड़ा बन रही है। विपक्ष को तारादेवी के हालिया वन कटान में वन मंत्री की भूमिका दिख रही है।
खनन माफिया को संरक्षण के आरोप पहले से लगते रहे हैं। इधर नए संगठन जिलों के मसले पर अपने भीतर बगावत झेल रही सत्तारूढ़ कांग्रेस के सामने विपक्ष का सामना एकजुटता से करने की चुनौती भी होगी। हालांकि सरकार इस सत्र में मानसून सत्र के मुकाबले ज्यादा बिजनेस ला रही है। टीसीपी और लोकायुक्त जैसे लोक महत्व के मसले भी विधेयकों के जरिए सदन में आएंगे।
ये मुद्दे बनेंगे टकराव का कारण
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह वीरवार सुबह ही ज्वालामुखी से कांगड़ा प्रवास शुरू कर रहे हैं। शाम को वह धर्मशाला पहुंच जाएंगे। सरकार के अन्य मंत्री और विधायक भी शाम को धर्मशाला में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हाजिरी भरेंगे। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले अगस्त में हुए मानसून सत्र में भी 24 बैठकें रखी थीं। लेकिन 6 से 29 अगस्त तक होने वाला ये सत्र विपक्ष से गतिरोध के कारण 11 दिन पहले ही अचानक खत्म करना पड़ा था।
-डीजल और पेट्रोल पर वैट बढ़ाना
-शिमला के तारादेवी में वन कटान
-डीजल सस्ता होने के बावजूद बस किराया न घटाना
-केंद्रीय विवि के नाम पर कांगड़ा जिला को लड़ाना
-कानून व्यवस्था की खराब हालत और खनन माफिया
-औद्योगिक विकास के नाम पर धारा 118 का दुरुपयोग
-ठियोग-हाटकोटी सड़क की बदहाली
-सरकार की खराब वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र
-बोर्ड-निगमों की खरीद और इनमें हुई नियुक्तियां
-सस्ते राशन में कटौती और इसके रेट बढ़ाना
सिविल जज जूनियर डिवीजन का बदलेगा पदनाम
हिमाचल प्रदेश की अदालतों से सिविल जज जूनियर और डिवीजन शब्द को हटाने की तैयारी है। इस सिलसिले में मंगलवार को कैबिनेट ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। धर्मशाला में आयोजित होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस संशोधित विधेयक को लाने की तैयारी है। प्रदेश सरकार की ओर से देश के पहले न्यायिक आयोग की सिफारिश पर यह कदम उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में सिविल जज जूनियर डिवीजन के स्थान पर नया पदनाम सिविल जज होगा जबकि सिविल जज सीनियर डिवीजन के स्थान पर नया पदनाम सीनियर सिविल जज होगा। विधेयक में संशोधन करने के लिए न्याय विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है, जिस पर कैबिनेट ने भी अपनी मुहर लगा दी है।
अब विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद इसे हिमाचल प्रदेश में लागू किया जा सकेगा। अफसरों का कहना है कि इसको लेकर किसी स्तर पर कोई अड़चन नहीं है। इससे राज्य के तकरीबन तीन दर्जन से अधिक जजों का पदनाम बदल जाएगा।
बैठक से पहले हटा खेल विधेयक का एजेंडा
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक से ठीक पहले विवादित खेल विधेयक को एजेंडे से हटा दिया गया। यह कदम क्यों उठाया गया, इस पर सवाल खड़ा हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि एक अधिकारी के इशारे पर इसे हटवाया गया जबकि, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद खेल विधेयक को लाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने अफसरों को निर्देश भी दिया था। वह प्रदेश में नए खेल विधेयक को लाकर खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं।
लोकायुक्त: मंत्रियों के रुख में अचानक बदलाव
कैबिनेट मंत्री कौल सिंह की अध्यक्षता सलेक्ट कमेटी ने पहले ही यह सिफारिश की थी कि लोकायुक्त के आदेश को न मानना अवमानना के दायरे में लाया जाए, लेकिन मानसून सत्र से ठीक पहले हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने इसे मानने से साफ तौर पर मना कर दिया था। कैबिनेट ने इस सिफारिश को नहीं माना था, जिसके बाद ही पिछले सत्र में इसे पेश किया गया था। लेकिन, मंगलवार की बैठक में अचानक उस हिस्से को जोड़ दिया गया। इस पर अफसरशाही भी नाराज है।
सरकार को घेरने को रचा ‘चक्रव्यूह’
बजट और मानसून सत्र के बाद भाजपा ने शीतकालीन सत्र में भी हिमाचल प्रदेश सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह चक्रव्यूह की रचना कर दी है। महज सात दिन के सत्र के लिए प्रदेश के विधायकों ने 450 से अधिक चुभते सवाल दाग दिए हैं, जिसका जवाब तलाशना सरकार के अफसरों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है।
प्रदेश की माली हालत से लेकर कानून और माफिया के राज्य में बढ़ते कदम से संबंधित तीखे प्रश्न किए गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार भी सत्र बेहद हंगामेदार हो सकता है। राजधानी में तारादेवी मंदिर के पास 35 बीघा जमीन पर काटे गए हरे पेड़ कटान के मुद्दे को भाजपा की ओर से प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। इसके लिए सवाल लगा दिए गए हैं।
सवालों के जवाब तैयार करना बना मुसीबत
इसी प्रकार अवैध खनन, नशाखोरी, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल, डीजल पर वैट बढ़ाने के फैसले, सड़क दुर्घटना, सड़कों की दुर्दशा, सरकार की ओर से लगातार लिए जा रहे कर्ज, लालबत्ती जैसे सुलगते सवालों पर भाजपा विधायकों ने प्रश्न दागे हैं। सूत्रों की मानें तो कई सवालों के जवाब तैयार करना महकमों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सचिवालय के तकरीबन हर अधिकारी सवालों के जवाब बनाने में जुटा है।
कई तो ऐसे अफसर हैं, जिनके पास सवालों के जवाब ही नहीं मिल पा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि पिछली बार भी 600 से अधिक सवाल लगे थे। इस बार भी भाजपा चाहती है कि जनता के मुद्दों पर चर्चा हो, लेकिन अगर सरकार ने विधायकों का अपमान किया तो फिर किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वैसे चार दिसंबर को भाजपा विधायक मंडल दल की बैठक तय की गई है, जिसमें अंतिम तौर पर रणनीति तय की जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार पूरी कोशिश करेगी कि विपक्ष से बात करके शीतकालीन सत्र को शांति पूर्ण तरीके से चलाए।
जल्दी हो रहे सत्र ने कइयों को उलझाया
दिसंबर पहले हफ्ते में हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र ने कइयों को उलझा दिया है। इससे पहले सत्र दिसंबर अंत या जनवरी के शुरू में होता रहा है। लेकिन इस बार जल्दी होने से एक ओर नेता शादियों को निपटाने में व्यस्त हैं, तो दूसरी ओर शिमला में स्कूली बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं ने सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को मुश्किल में डाल दिया है। सत्र में हाजिरी भरने के लिए अब सभी को एडजस्टमेंट करनी पड़ रही है।
बुधवार को उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री अपने चुनाव क्षेत्र में शादियां अटेंड कर रहे थे। उन्होंने बताया कि दो दिन में उन्हें 24 निमंत्रण शादियों के थे। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल कहते हैं कि उन्होंने 8 शादियां पिछले कल अटेंड कीं, तो 8-10 ही बुधवार को हैं। देहरा से विधायक रविंद्र रवि भी शादियों में व्यस्त थे।
धर्मपुर से भाजपा विधायक विधायक महेंद्र सिंह कहते हैं कि अपने चुनाव क्षेत्र में ही 20 शादियां हैं। अब सभी के पास जाना जरूरी है। इसलिए हमीरपुर में हो रही विधायक दल की बैठक में जाना और फिर धर्मशाला विधानसभा सत्र में पहुंचना एक चुनौती है।
बहुत व्यस्त हैं मंत्री
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी पहले एक पारिवारिक समारोह के लिए रामपुर जाना है और फिर 7 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के लिए दिल्ली जाना है। धूमल भी रिश्तेदारी में धर्मशांति के लिए 5 दिसंबर को शायद सत्र में न पहुंच पाएं। नाहन से भाजपा विधायक राजीव बिंदल चुनावी ड्यूटी पर जम्मू कश्मीर में हैं। इनका पहुंचना भी तय नहीं है।
इधर 9 दिसंबर को ही कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी का जन्मदिन है। इसके लिए भी कुछ कांग्रेस नेता दिल्ली जा सकते हैं। ऐसे में विधानसभा सत्र में कितनी उपस्थिति रहेगी ये बड़ा सवाल है? खासकर तब जबकि इस सत्र में लोकायुक्त और टीसीपी जैसे अहम विधेयक लाए जा रहे हों।
रवाना होने लगा सरकारी अमला
शीतकालीन सत्र के लिए सरकारी अमला बुधवार से रवाना होने लगा। प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक मंत्री और अफसर धर्मशाला पहुंच चुके हैं। वीरवार को शाम तक पूरी सरकार पूरा धर्मशाला प्रवास पर होगी। इसमें मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लेकर मुख्य सचिव पी मित्रा तक शामिल होंगे। चार दिसंबर को शाम को ही सत्ता पक्ष को सदन चलाने के लिए रणनीति भी तय करनी है।
धर्मशाला में पांच दिसंबर से हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है। इसको लेकर शिमला से रवानगी शुरू हो गई है। प्रदेश के तकरीबन सभी मंत्री और कांग्रेसी विधायक वीरवार को धर्मशाला पहुंच जाएंगे। कई मंत्री तो बुधवार को ही धर्मशाला के लिए रवाना हो गए। इसके अलावा प्रदेश के अफसरों भी धर्मशाला पहुंचने लगे हैं।
उनकी ओर से अपनी तैयारी के लिए समय से पहले पहुंचा जा रहा है, जिससे सवालों के जवाब तैयार कराने में किसी स्तर पर कोई अड़चन खड़ी न होने पाए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और मुख्य सचिव पी मित्रा वीरवार शाम तक धर्मशाला पहुंच जाएंगे।
खेल विधेयक पर सस्पेंस
राज्य सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान आमतौर पर एक कैबिनेट बैठक धर्मशाला में करती रही है, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं है। इधर, खेल विधेयक पर सस्पेंस बरकरार है। अनुराग ठाकुर की एचपीसीए पर शिकंजा कसने के लिए पहले इसी सत्र में इसे लाने की चर्चा थी। खेल विभाग ने इसे लॉ से वेट भी करवा लिया था। लेकिन मंगलवार को हुई कैबिनेट में इसे नहीं रखा गया।
संभव है कि धर्मशाला में कैबिनेट हो और इसे रखा जाए। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इसी साल एक बार पहले भी चूंकि इसे कैबिनेट लौटा चुकी है, इसलिए सरकार हर कदम फूंक फूंककर रखना चाहती है। एचपीसीए के खिलाफ अब वैसे भी चार केस कोर्ट पहुंच गए हैं। ऐसे में विधेयक का रास्ता इतना आसान भी नहीं है।