वन्य जीवन हिमाचल: शिकार पर प्रतिबंध से आबादी के बीच घूम रहे आईबैक्स
10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर विचरण करने वाले दुर्लभ वन्य जीवों को इन दिनों हर कोई कहीं भी कैमरे में कैद कर रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन वन्य जीवों के शिकार पर लाहौल में पूर्ण प्रतिबंध है। तभी यह प्राणी स्वतंत्र व बेखौफ होकर रह रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में वन्य जीवों का शिकार न होने से अब आईबैक्स (टंगरोल) आबादी के साथ भी घुल मिल गए हैं। 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर विचरण करने वाले दुर्लभ वन्य जीवों को इन दिनों हर कोई कहीं भी कैमरे में कैद कर रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन वन्य जीवों के शिकार पर लाहौल में पूर्ण प्रतिबंध है। तभी यह प्राणी स्वतंत्र व बेखौफ होकर रह रहे हैं। स्तींगरी गांव के समीप शुक्रवार सुबह ही आईबैक्स के झुंड को स्थानीय लोगों ने घास चरते हुए देखा। इसका एक व्यक्ति ने करीब से वीडियो बनाया है। लोगों के साथ घूमते आईबैक्स को देखे जाने से साफ जाहिर है कि इन जीवों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो रही है। लाहौल आने वाले पर्यटक यहां की वादियों समेत इन दिनों खूबसूरत हिमालयन आईबैक्स को भी करीब से निहार सकते हैं।
बर्फ पिघलने के बाद मनाली-लेह मार्ग पर अभी भी सड़क के आसपास आईबैक्स देखे जा सकते हैं। लाहौल घाटी में आईबैक्स, बर्फानी तेंदुआ, घोरल, भूरा और काला भालू, कस्तुरी मृग, हिमालयन थार, हिमालयन रेड फोक्स कई ऐसे जीव जंतु मौजूद हैं। जिले में महिलाओं की एक बड़ी पहल से वन्य जीवों के शिकार व अवैध वन कटान पर पाबंदी लगाने से संरक्षण मिला है। इससे इन जीव जंतुओं की संख्या में भी वृद्धि देखी जा रही है। भूलकर भी इस जिले में वन्यजीवों से छेड़छाड़ करने की सोच भी मत रखिएगा। इस मामले में यहां की महिलाएं काफी सख्ती भी बरते हुए हैं। लाहौल डीएफओ दिनेश शर्मा ने कहा कि बर्फ पिघलने के बाद आईबैक्स ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर निकल जाते हैं, इन दिनों पहाड़ों में पानी भी आसानी से मिल जाता है। डेढ़ दशक से लाहौल में शिकार का एक भी मामला नहीं है।