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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Wildlife Himachal: Due to the ban on hunting, ibex roaming among the population

वन्य जीवन हिमाचल: शिकार पर प्रतिबंध से आबादी के बीच घूम रहे आईबैक्स

Sat, 02 Apr 2022 12:02 PM IST
Krishan Singh दिनेश जस्पा, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
दिनेश जस्पा, उदयपुर (लाहौल-स्पीति) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 02 Apr 2022 12:02 PM IST
सार

10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर विचरण करने वाले दुर्लभ वन्य जीवों को इन दिनों हर कोई कहीं भी कैमरे में कैद कर रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन वन्य जीवों के शिकार पर लाहौल में पूर्ण प्रतिबंध है। तभी यह प्राणी स्वतंत्र व बेखौफ होकर रह रहे हैं। 

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Wildlife Himachal: Due to the ban on hunting, ibex roaming among the population
आबादी के बीच घूम रहे आईबैक्स - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में वन्य जीवों का शिकार न होने से अब आईबैक्स (टंगरोल) आबादी के साथ भी घुल मिल गए हैं। 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर विचरण करने वाले दुर्लभ वन्य जीवों को इन दिनों हर कोई कहीं भी कैमरे में कैद कर रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन वन्य जीवों के शिकार पर लाहौल में पूर्ण प्रतिबंध है। तभी यह प्राणी स्वतंत्र व बेखौफ होकर रह रहे हैं। स्तींगरी गांव के समीप शुक्रवार सुबह ही आईबैक्स के झुंड को स्थानीय लोगों ने घास चरते हुए देखा। इसका एक व्यक्ति ने करीब से वीडियो बनाया है। लोगों के साथ घूमते आईबैक्स को देखे जाने से साफ जाहिर है कि इन जीवों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो रही है। लाहौल आने वाले पर्यटक यहां की वादियों समेत इन दिनों खूबसूरत हिमालयन आईबैक्स को भी करीब से निहार सकते हैं।

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बर्फ पिघलने के बाद मनाली-लेह मार्ग पर अभी भी सड़क के आसपास आईबैक्स देखे जा सकते हैं। लाहौल घाटी में आईबैक्स, बर्फानी तेंदुआ, घोरल, भूरा और काला भालू, कस्तुरी मृग, हिमालयन थार, हिमालयन रेड फोक्स कई ऐसे जीव जंतु मौजूद हैं। जिले में महिलाओं की एक बड़ी पहल से वन्य जीवों के शिकार व अवैध वन कटान पर पाबंदी लगाने से संरक्षण मिला है। इससे इन जीव जंतुओं की संख्या में भी वृद्धि देखी जा रही है। भूलकर भी इस जिले में वन्यजीवों से छेड़छाड़ करने की सोच भी मत रखिएगा। इस मामले में यहां की महिलाएं काफी सख्ती भी बरते हुए हैं। लाहौल डीएफओ दिनेश शर्मा ने कहा कि बर्फ पिघलने के बाद आईबैक्स ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर निकल जाते हैं, इन दिनों पहाड़ों में पानी भी आसानी से मिल जाता है। डेढ़ दशक से लाहौल में शिकार का एक भी मामला नहीं है। 

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