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डब्ल्यूएचओ का दावा, भारत में फिर पोलियो वायरस आने की आशंका
Sun, 04 Aug 2019 12:40 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 04 Aug 2019 12:40 PM IST
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- फोटो : google
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भारत भले ही पांच साल पहले पोलियो वायरस से मुक्त हो गया है लेकिन देश में इस बीमारी के वायरस फैलने की आशंका अभी भी बनी हुई है। ट्रेनिंग के लिए आए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मेडिकल सर्विलांस अधिकारी डॉ. वाई तोमर ने यह अंदेशा जताया है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में डॉ. तोमर ने खुलासा किया कि पोलियो मुक्त होने के बावजूद देश में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर से सर्विलांस की प्रक्रिया जारी है।
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पड़ोसी मुल्क अभी तक पोलियो वायरस से मुक्त नहीं हुए हैं। ऐसे में व्यापारिक रिश्तों के अलावा अन्य कारणों से लोगों का पड़ोसी मुल्कों में आना जाना रहता है। ऐसी स्थिति में पोलियो वायरस से ग्रस्त देशों से भारत में भी वायरस के आने की आशंका बनी हुई है। डॉ. तोमर ने बताया कि प्रतिरक्षण कार्यक्रम के साथ ही सर्विलांस का काम पोलियो मुक्त अभियान के लिए बेहद अहम है।
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साल 2011 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पोलियो वायरस ग्रस्त मरीज का मामला सामने आया था। इसके बाद डब्ल्यूएचओ के नियमानुसार 2014 तक कोई भी केस सामने नहीं आया था। इसके बाद भी अभी तक देश में एक भी पोलियो का केस सामने नहीं आया है।
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हालांकि डब्ल्यूएचओ का दावा है कि जब तक पड़ोसी देश भी पोलियो वायरस से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाते हैं, भारत में भी फिर से इस बीमारी के वायरस फैलने की आशंका बनी हुई है। इसका ताजा उदाहरण ईरान के एक बच्चे में पोलियो के वायरस मिलने से सामने आया है। ईरान भी भारत की तरह पोलियो से मुक्त देश घोषित हो चुका है लेकिन अपने पड़ोसी मुल्क की यात्रा के बाद यह बच्चा पोलियो की चपेट में आ गया।
सबसे पहले मिस्र में पाया गया पोलियो वायरस
दुनिया में सबसे पहले करीब पांच हजार ईसवी पूर्व मिस्र में पोलियो बीमारी का मामला सामने आया था। डॉ. तोमर बताते हैं कि मिस्र में खुदाई में मिले पांच हजार ईसवी पूर्व के अभिलेख में अंकित चित्रों में इसकी पुष्टि होती है। संभवत: पोलियो का वायरस भी सबसे पहले जानवरों में ही पाया गया था।