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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Whether or not a patient is admitted to the hospital will be decided by the doctor, not the insurance company.

Shimla News: अस्पताल में मरीज दाखिल होगा या नहीं ये डॉक्टर तय करेगा, न की बीमा कंपनी

Wed, 16 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:59 PM IST
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Whether or not a patient is admitted to the hospital
will be decided by the doctor, not the insurance company.
कोरानाकाल में दाखिल मरीज का क्लेम खारिज करने पर आयोग की कंपनी के खिलाफ टिप्पणी
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कंपनी को 1.87 लाख रुपये ब्याज सहित चुकाने के आदेश
40 हजार रुपये का हर्जाना भी कंपनी को देना होगा
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने स्वास्थ्य बीमा दावों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता का निर्णय उपचार करने वाला डॉक्टर करता है, न कि बीमा कंपनी।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता का कोविड-19 क्लेम 9 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा कंपनी पर मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में 40 हजार रुपये का हर्जाना भी देना होगा।
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शिमला निवासी यतिका मल्होत्रा और उनके पति अक्षर मल्होत्रा ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से 5 लाख रुपये का फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस लिया था। 13-14 अप्रैल 2021 को आईजीएमसी में यतिका मल्होत्रा की कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। तबीयत बिगड़ने और ऑक्सीजन स्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए उन्हें जालंधर के श्रीमन सुपरस्पेशलिटी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें 16 से 24 अप्रैल 2021 तक भर्ती रखा गया था। अस्पताल में उपचार पर 1,87,685 रुपये का खर्च आया था। मरीज के ठीक होने के बाद जब बीमा कंपनी को क्लेम भेजा गया तो कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि भर्ती के समय मरीज का ऑक्सीजन स्तर 100 प्रतिशत था और सभी वाइटल्स सामान्य थे।
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बीमा कंपनी ने यह दिया था तर्क
बीमा कंपनी की मेडिकल टीम का तर्क था कि मरीज का इलाज होम क्वारंटीन में हो सकता था और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी। इसके खिलाफ शिकायतकर्ताओं ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने कहा कि कोविड-19 एक अप्रत्याशित और जानलेवा वायरस था, जिसमें मरीज की हालत कभी भी बिगड़ सकती थी। ऐसे में एहतियातन अस्पताल में भर्ती करने का डॉक्टर का फैसला पूरी तरह जायज था। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनियां तकनीकी आधार पर वैध दावों को खारिज नहीं कर सकतीं। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ताओं को क्लेम राशि शिकायत दर्ज करने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करें। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च 45 दिन के भीतर चुकाने होंगे।
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