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सचिवालय तक का पेयजल संकट दूर नहीं कर सकी सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:48 PM IST
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शिमला नगर निगम चुनाव के मतदान की तैयारियों में जुटी सरकार पर कर्मचारी नेताओं ने निशाना साधा है। प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने कहा है कि जो सरकार प्रदेश के प्रशासन को नियंत्रित करने वाले राज्य सचिवालय का जल संकट तक दूर नहीं कर सकी, वह शिमला नगर निगम की सत्ता पर काबिज होने का सपना संजो रही है।
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प्रदेश में जिस तरह के हालात हैं, उससे सरकार की प्रशासनिक काबिलियत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने नगर निगम चुनावों के बीच 50 से अधिक सरकारी अधिकारियों के तबादलों पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के दौरान भ्रष्टाचार को जबरदस्त तरीके से बढ़ावा मिला है। यही नहीं, आगे कहा कि जल्द ही सीबीआई की जांच की आंच सीएम कार्यालय तक पहुंचेगी।
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महासंघ के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया, पूर्व महासचिव हेमराज शर्मा, वेद प्रकाश, रमेश चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार कर्मचारियों और अधिकारियों को शांति और स्थिरता से एक स्थल पर कार्य नहीं करने दे रही है। इस अस्थिरता के कारण कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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कांग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस का अपना संकल्प पूरा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण प्रदान कर रही है और रिटायर्ड अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय में बिठाने से प्रदेश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है। कहा कि नगर निगम चुनाव एक लिहाज से विधानसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास हैं और इसमें कर्मचारियों की अहम भूमिका रहेगी।