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नौ बार फेल हुए पानी के सैंपल, सोया रहा आईपीएच विभाग

Mon, 01 Feb 2016 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 01 Feb 2016 10:28 AM IST
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water sample failed iph department municipal corporation shimla

राजधानी में पीलिया फैलने के लिए आईपीएच विभाग की एक और लापरवाही का खुलासा हुआ है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आईपीएच के मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कई खामियों को लेकर आईपीएच विभाग को कई बार आगाह किया और सुझाव भी दिए, लेकिन विभाग की कान पर जूं नहीं रेंगी। पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चुप्पी तोड़ दी है और सारा ठीकरा आईपीएच के सिर फोड़ा है।

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बोर्ड ने खुलासा किया है कि मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ट्रीटेड वाटर के सैंपल नौ बार फेल हो चुके हैं। इसमें बीओडी (बॉयो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) 30 डिग्री से अधिक पाया गया। ट्रीट किए पानी की क्वालिटी में खराबी पाए जाने पर आईपीएच विभाग के एक्सईएन को नोटिस और इंजीनियर इन चीफ को नोटिस की एक प्रति भी जारी की गई, लेकिन विभाग ने पानी की गुणवत्ता के लिए कुछ नहीं किया।
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आईपीएच के जिम्मेदार अधिकारियों को सुधार के लिए सुझाव भी दिए। बावजूद प्लांट संचालन और सीवेज ट्रीटमेंट में कोई सुधार नहीं हुआ। पहली मर्तबा बोर्ड ने चुप्पी तोड़ 2013 से लेकर अब तक की गई कार्रवाई और सैंपल टेस्टिंग को लेकर अपना पक्ष रखा।
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बोर्ड ने नवंबर 2013 से लेकर कई मर्तबा नोटिस जारी किए। इतना ही नहीं प्लांट संचालन में पाई गई खामियां और आउट लेट से छोड़े जा रहे पानी में बीओडी (बॉयो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) अधिक पाए जाने को लेकर आगाह किया।

नवंबर 2013 से लेकर हर तीन माह में एक बार औचक निरीक्षण कर एसटीपी मल्याणा के आउटलेट से निकलने वाले ट्रीटेड वाटर के सैंपल 18 जनवरी तक नौ बार फैल हुए। इसमें बीओडी 30 डिग्री से अधिक पाया गया, कई मर्तबा सलज पानी में बहता पाया भी गया।

कब- कब दिए आईपीएच को नोटिस-
5 अक्तूबर 2013, 20 नवंबर, 12 फरवरी 2014, 10 मार्च 2014, 7 अप्रैल 2014 को सदस्य सचिव ने स्वयं सैंपल फेल होने पर आईपीएच को नोटिस दिए और बाकायदा इसकी प्रति सुझाव के साथ आईपीएच के ईएनसी को भेजी गई।

14 अप्रैल 2014 को, 14 फरवरी 2015 को, आठ दिसंबर 2015 और 18 जनवरी 2016 को भी आईपीएच को नोटिस दिया गया। इसके बाद 18 जनवरी से लेकर रोज एसटीपी से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं, जो अभी भी सही नहीं पाए जा रहे हैं।

बोर्ड ने आईपीएच को ये दिए सुझाव-
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आईपीएच को प्लांट संचालन और सीवेज ट्रीटमेंट में सुधार लाने को विस्तृत सुझाव दिए। बिजली न होने पर होल्डिंग टैंक का निर्माण करने, डीजी सेट लगाने आदि के लिए भी कहा था।

जब भी बीओडी अधिक आया, नोटिस दिया-
बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप पठानिया ने कहा कि बोर्ड ने समय- समय पर पानी के सैंपल लिए। पानी की क्वालिटी में खराबी पाए जाने पर आईपीएच विभाग के एक्सईएन को नोटिस और इंजीनियर इन चीफ को नोटिस की प्रति जारी की जाती रही।

मामला एसटीपी का था, बोर्ड के पास आगामी कार्रवाई की शक्तियां भी नहीं होती है। प्लांट की बिजली काटना मुश्किल था, इससे प्लांट बंद हो जाता। उन्होंने कहा कि विभाग ने लगातार प्लांट से खड्ड में छोड़े जाने वाले पानी की सैंपलिंग की, इसकी रिपोर्ट में जब भी बीओडी अधिक पाया गया तो इसको लेकर आईपीएच को नोटिस दिए गए हैं।

सुझाव दिए पर नहीं हुआ सुधार-
बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पीने के पानी की टेस्टिंग की जिम्मेदारी बोर्ड की नहीं रहती है, यह पूरी तरह से आईपीएच और नगर निगम का काम है।

बोर्ड ने बाकायदा आईपीएच विभाग के एसटीपी इंचार्ज अधिकारी एक्सईएन को नोटिस जारी किए। पानी की क्वालिटी में सुधार और प्लांट को सही ढंग से संचालित करने को विस्तृत सुझाव भी लिखित में दिए। बावजूद सुधार नहीं हुआ।

बड़ागांव ट्रीटमेंट प्लांट को दुरुस्त करेगी निजी कंपनी- विजय खाची, शिमला। बड़ागांव सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अब निजी कंपनी ही दुरुस्त करेगी। यह कंपनी इसकी जांच करेगी और इसकी खामियों को ठीक करेगी। ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद प्रदेश का आईपीएच महकमा एकाएक हरकत में आ गया है।

विभाग ने लोधी रोड स्थित नई दिल्ली की इस कंपनी के अधिकारियों से बात कर ली है। नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड नामक इस कंपनी के तकनीकी अधिकारी आगामी दिनों में शिमला शहर के तहत बड़ागांव के पास हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े लालपानी प्लांट का दौरा कर सकते हैं।

इस प्लांट का ठेका वर्ष 2000 के आसपास इस निजी कंपनी को दिया गया था। उस समय ये ठेका 11 करोड़ 92 लाख 40 हजार 574 रुपये के करीब दिया गया था। इस प्लांट में लोअर बाजार, मालरोड से लेकर तारादेवी-संकटमोचन, खलीणी- बीसीएस, छोटा शिमला, न्यू शिमला, विकासनगर आदि इलाकों के सीवेज का गंदा पानी जाता है।

इन क्षेत्रों की सीवरेज पाइपों को इस प्लांट में जोड़ा गया है। ये हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा सीवेज प्लांट है। प्लांट से निकलने के बाद इसका पानी दोगड़ा पुल के पास मिलता है और अश्वनी खड्ड में मिलता है। आगे जाकर उसी खड्ड से सोलन शहर के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है। सोलन में पीलिया के बड़ी संख्या में मरीजों के सामने आने का कारण भी ये पानी हो सकता है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य पीसी धीमान ने कहर कि सरकार पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। जिन कंपनियों ने सीवेज प्लांट बनाए हैं, वही इनके तकनीकी पहलुओं की ठीक से जानकारी दे सकते हैं। अधिकारी कंपनियों से भी संपर्क कर रहे हैं।

1134 नोटिस, 77 पानी कनेक्शन कटे-
शहर में पीलिया फैलने के बाद नगर निगम की ओर से शुरू किए गए निरीक्षण अभियान के दौरान नियमों की अवहेलना करने पर 1134 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस जारी करने के बावजूद मनमानी करने पर 77 लोगों के पानी के कनेक्शन काटे गए।

पीलिया को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए नगर निगम की सात टीमें 8871 लोगों के घर पहुंची। यह जानकारी नगर निगम आयुक्त पंकज राय ने समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। निगम आयुक्त पंकज राय ने बताया कि पीलिया को लेकर लोगों को जागरूक करने और सीवरेज लाइनों में लीकेज जांचने के लिए एसिस्टेंट नोटल अफसरों की अगुवाई में सात टीमें गठित की गई थीं।

इस दौरान सीवरेज की लीकेज जांचने के अलावा लोगों को अपने घरों की पानी की टंकियां साफ करवाने को लेकर भी जागरूक किया गया। अभियान के पहले चरण में ढली, संजौली, इंजनघर, चमियाणा, मल्याणा, कुसुम्पटी, छोटा शिमला, न्यू शिमला, खलीनी और कनलोग वार्ड में टीमों ने निरीक्षण किया।

अभियान के तहत दूसरे चरण में रुल्दूभट्टा, टूटीकंडी, नाभा, फागली और कृष्णानगर वार्ड में 10 फरवरी तक अभियान चलाया जाएगा। आयुक्त पंकज राय ने शहर के लोगों से अपनी सीवर लीकेज सुधारने और किचन वेस्ट वाटर को एमसी लाइन से जोड़ने की अपील की है।


शहर के 39 सेक्टर स्टोरेज टैंकों की सफाई का काम पूरा-
शहर में पीलिया फैलने के मद्देनजर एहतियात की तौर पर नगर निगम की ओर से सेक्टर स्टोरेज टैंकों की सफाई का काम पूरा हो गया है। इस विशेष अभियान के तहत नगर निगम ने शहर में वार्ड स्तर पर बने 39 स्टोरेज टैंकों की सफाई करवाई है। आवश्यकतानुसार टैंकों की मरम्मत का कार्य भी करवाया गया है।

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