रेणुका झील की सेहत जांचेंगे यूरोप के उपकरण, जानिए इनकी खासियत
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प्रदेश की ऐतिहासिक रेणुका झील के पानी की शुद्धता की जांच अब वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी। यूरोप से मंगवाए गए एक विशेष व आधुनिक उपकरण को रेणुका में स्थापित किया गया है। प्रदेश भर में इस तरह का यह पहला उपकरण है, जिसे केवल रेणुका वेटलैंड में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के सौजन्य से स्थापित किया गया है।
प्रदेश के अन्य वेटलैंड में भी इस उपकरण के स्थापित होने की संभावनाएं हैं। वन्य प्राणी विहार रेणुका से जुड़े कर्मचारियों को इस उपकरण के प्रयोग की विधि का वीरवार को प्रशिक्षण दिया गया।
पानी की शुद्धता की जांच के लिए लगाए गए वाटर क्वालिटी टेस्टिंग मल्टीपैरामीटर नामक इस उपकरण की कीमत चार लाख रुपये के करीब बताई जा रही है। एक मल्टी नेशनल कंपनी ने इसे यूरोप से मंगवाया गया है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रवि कुमार शर्मा ने बताया कि इस पैरामीटर के माध्यम से झील के पानी की गुणवत्ता के साथ-साथ झील की सेहत का भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन किया जा सकेगा।
जिसका रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा। पैरामीटर के माध्यम से झील के पानी की पीएच, कनेक्टिविटी, हाइड्रोजन, तापमान, पानी की गुणवत्ता व शुद्धता को चंद सेकंड में नापा जाएगा।
जांच में शुद्ध पाया गया रेणुका झील का पानी
बीते दिन कंपनी के वरिष्ठ तकनीकी कर्मचारी राजू कुमार ने विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को इस उपकरण को चलाने की विधि का प्रशिक्षण दिया। उनको उपकरण का डेमो दिखाकर विभिन्न स्थानों से रेणुका झील के पानी की जांच भी की। इस दौरान जांचा गया पानी शुद्ध पाया गया। इसके पानी में पीएच 8.05, एक्टिविटी 339, टीडीएस 270 व तापमान 30 डिग्री पाया गया।
यह पैमाना वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के मापदंडों के अनुसार सेहत के लिए उपयोगी है। झील के पानी में किसी भी तरह के प्रदूषण की मात्रा नहीं मिली है। इस मौके पर जीआईजेड की वैज्ञानिक अवंतिका भास्कर भी मौजूद रहीं। जबकि विभाग के आरओ देविंद्र सिंह, बीओ राकेश कुमार, वीरेंद्र सिंह, रामदयाल, रामपाल, कमलेश व कंवर सिंह ने उपकरण को चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।