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मुफ्त पानी देने पर मंत्रिमंडल में हुई चर्चा
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शहरी विकास विभाग ने तैयार किया है प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में लोगों को भारी भरकम पेयजल बिलों से राहत देने के लिए 20 किलोलीटर तक मुफ्त पानी देने के प्रस्ताव पर भी बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा हुई।
शहरी विकास विभाग की ओर से इस प्रस्ताव को बैठक में चर्चा के लिए रखा गया।
सूत्रों के अनुसार शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस प्रस्ताव के बारे में मंत्रियों को बताया। प्रस्ताव के अनुसार शिमला शहर में हर महीने प्रति कनेक्शन 20 किलोलीटर यानि 20,000 लीटर मुफ्त पानी देने की योजना है। अभी शिमला में प्रदेश में सबसे महंगी दरों पर पेयजल बिल वसूले जाते हैं। एक तय सीमा तक मुफ्त पानी देने से लोगों पर बिलों का बोझ कम होगा। प्रस्ताव को लेकर सुझाव भी दिए गए।
मुफ्त पानी देने से सरकार पर कितना बोझ पड़ेगा, इसे लेकर भी बात हुई। हालांकि, बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया। सूत्रों के अनुसार बाकी मंत्रियों ने कहा कि शिमला शहर के साथ साथ प्रदेश के बाकी शहरी इलाकों में भी इसे लागू करना पड़ेगा। सरकार इस पर भी विचार कर सकती है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर फैसला ले सकती है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल बिल माफ करने पर सरकार पहले ही फैसला ले चुकी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में लोगों को भारी भरकम पेयजल बिलों से राहत देने के लिए 20 किलोलीटर तक मुफ्त पानी देने के प्रस्ताव पर भी बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा हुई।
शहरी विकास विभाग की ओर से इस प्रस्ताव को बैठक में चर्चा के लिए रखा गया।
सूत्रों के अनुसार शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस प्रस्ताव के बारे में मंत्रियों को बताया। प्रस्ताव के अनुसार शिमला शहर में हर महीने प्रति कनेक्शन 20 किलोलीटर यानि 20,000 लीटर मुफ्त पानी देने की योजना है। अभी शिमला में प्रदेश में सबसे महंगी दरों पर पेयजल बिल वसूले जाते हैं। एक तय सीमा तक मुफ्त पानी देने से लोगों पर बिलों का बोझ कम होगा। प्रस्ताव को लेकर सुझाव भी दिए गए।
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मुफ्त पानी देने से सरकार पर कितना बोझ पड़ेगा, इसे लेकर भी बात हुई। हालांकि, बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया। सूत्रों के अनुसार बाकी मंत्रियों ने कहा कि शिमला शहर के साथ साथ प्रदेश के बाकी शहरी इलाकों में भी इसे लागू करना पड़ेगा। सरकार इस पर भी विचार कर सकती है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर फैसला ले सकती है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल बिल माफ करने पर सरकार पहले ही फैसला ले चुकी है।
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