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पेयजल संकटः भवन निर्माण पर लगाई रोक, नहीं बन रहा मिड-डे मील

Tue, 29 May 2018 11:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 29 May 2018 11:30 AM IST
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Water crisis in Himachal, including capital, remains persists

हिमाचल में पानी की किल्लत के चलते भवन निर्माण पर प्रतिबंध लग गया है। यह प्रतिबंध तब तक रहेगा, जब तक हिमाचल में पानी की व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट आती। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने भी फिलहाल व्यावसायिक कनेक्शनों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देना बंद कर दिया है।

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हिमाचल में पानी के लिए त्राहिमाम मचा है। शिमला, सिरमौर, मंडी, बिलासपुर, ऊना और हमीरपुर जिलों में पानी को लेकर स्थिति बेकाबू हो गई है। टैंकरों और हैंडपंपों से व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट आ रही है। 
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हिमाचल में अकसर बरसात के समय भवन निर्माण पर प्रतिबंध लगाया जाता है। यह इसलिए कि प्लॉट की कटिंग करने से साथ लगते भवनों को खतरा हो जाता है। 

पानी पर शुरू हुई राजनीति

Water crisis in Himachal, including capital, remains persists

सिर्फ गर्मी के मौसम से ही कंस्ट्रक्शन का काम किया जाता है। पानी की किल्लत के चलते यह काम रुक गया है। सरकार का मानना है कि कंस्ट्रक्शन के लिए पानी नहीं मिलेगा। लोगों को नदी-नालों से स्वयं पानी की व्यवस्था कर भवन निर्माण करना होगा। 

हिमाचल में पानी को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस के लिए सरकार को घेरने का का अच्छा-खासा बहाना मिल गया है तो माकपा भी मंगलवार को पानी की किल्लत को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने जा रही है। शहरी निकायों में भी विपक्ष को मुद्दा मिल गया है।  

सरकारी स्कूलों में बंद हुआ मिड डे मील बनना

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प्रदेश में उपजे जल संकट के चलते सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाना मुश्किल हो गया है। सोमवार को राजधानी शिमला सहित प्रदेश के कई शहरों में स्थित स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन नसीब नहीं हुआ।

खाना बनाने के लिए पानी नहीं मिलने से यह परेशानी खड़ी हुई है। कुछ स्कूलों में मिड-डे मील प्रभारियों ने स्कूल स्टाफ की मदद से प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाकर खाना बनाने का बंदोबस्त किया। उधर, पानी की कमी से कई स्कूलों में शौचालय भी बंद हो गए हैं। बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

प्र्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को रोजाना मिड-डे मील परोसा जाता है। प्रदेश में इस दिनों जारी पानी की कमी के चलते स्कूलों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। शिमला शहर में स्थित कई स्कूलों में सोमवार को पानी नहीं होने के चलते मिड-डे मील नहीं बनाया जा सका।

शिमला के अलावा मंडी, सोलन, बिलासपुर, कुल्लू और सिरमौर जिले के स्कूलों में भी मिड-डे मील बनाने के लिए परेशानियां खड़ी हो गई हैं। 
उधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने बताया कि पानी की कमी के चलते मिड-डे मील प्रभावित न हो, इसका विशेष बंदोबस्त करने के आदेश दिए गए हैं। स्कूल प्रभारी अपने स्तर पर पानी की इंतजाम कर रहे हैं। 

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जंगल की आग पर काबू पाने में आड़े आने लगा पानी संकट

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जबरदस्त गर्मी के चलते छोटे जलाशयों में पानी कम होने से पैदा हुए पानी के संकट का असर अब जंगल की आग पर काबू पाने में आने लगा है। पानी की कमी के चलते अब जंगलों की आग बुझाने वाले अग्निशमन और वन विभाग के कर्मचारियों को पानी की कमी पीछे हटने पर मजबूर कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि अब अग्निशमन विभाग ने भी अपनी प्राथमिकता में बदलाव करते हुए पानी की उपलब्धता केे अनुसार आबादी के आसपास के क्षेत्र में पहुंच रही आग को नियंत्रित करने पर फोकस कर दिया है।

सूबे के करीब पौने चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर अपना असर दिखा चुकी जंगल की आग को बुझाना अब कर्मचारियों  के लिए मुश्किल हो गया है। लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं के बीच अब पानी की कमी ने मुश्किलें बढ़ा दी है।

पानी की कमी की वजह से आग पर काबू नहीं पाया जा पा रहा

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सूत्रों की माने तो कई जगह जंगल की आग को बुझाने के लिए दूसरी तरफ से नियंत्रित आग लगाई जाती है। साथ ही अग्निशमन विभाग की मदद से आग पर नियंत्रण भी पाया जाता है। लेकिन पानी की कमी की वजह से आग पर काबू नहीं पाया जा पा रहा।

अफसरों ने भी आबादी के आसपास की आग पर अपना फोकस कर दिया है। कुल्लू के जंगलों में आग की घटनाएं रूकने का नाम नहीं ले रही है। उपमंडल बंजार के अंतर्गत आने वाले दलासणी बीट के जंगल में आग लगी हुई है। हमीरपुर में आग की घटनाओं का सिलसिला जारी है।

सोमवार को जिला के तीन जंगलों में आग लगने की सूचना है। वहीं, सोलन जिले में अब तक 450 हेक्टेयर जंगल राख हो चुके हैं। 375 हेक्टेयर क्षेत्र में तो अभी भी आग लगी हुई है। वन विभाग को पांच लाख रुपये तक का नुकसान होने की बात कही जा रही है। 

गर्मियों में पहली बार उधार पर बिजली ले रहा हिमाचल

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पेयजल संकट से जूझ रहे हिमाचल में अब बिजली संकट भी खड़ा होने वाला है। बारिश नहीं होने से प्रदेश में बिजली उत्पादन प्रभावित होना शुरू हो गया है। स्थिति से निपटने के लिए अब गर्मियों में पहली बार उधार पर बिजली लेना शुरू कर दी गई है।

इन दिनों पंजाब से प्रतिदिन 48 लाख यूनिट बिजली बैंकिंग पर ली जा रही है। इस बिजली को हिमाचल जुलाई-अगस्त महीने के दौरान पंजाब को वापस करेगा। देश में ऊर्जा राज्य नाम से विख्यात हिमाचल में स्थित बिजली परियोजनाओं में पानी की कमी के चलते उत्पादन में भारी कमी आ गई है।

बीते दिनों हिमाचल सरकार ने दस दिनों के लिए अपने कोटे की बिजली देकर काम चलाया। ढाई रुपये प्रति यूनिट के दाम पर सरकार ने बिजली बोर्ड को बिजली बेची। अब घाटे का सौदा न करते हुए सरकार ने दूसरे राज्यों को साढ़े चार रुपये से साढ़े पांच रुपये के बीच बिजली बेचना शुरू कर दिया है।

ऐसे में प्रदेश की जनता को बिजली संकट से बचाने के लिए बिजली बोर्ड ने पहली बार गर्मियों के मौसम में भी पड़ोसी राज्य से उधार पर बिजली लेना शुरू कर दिया है।

हालात अगर ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में हिमाचल में स्थिति और खराब हो सकती है। पेयजल संकट के साथ-साथ प्रदेश की जनता को बिजली संकट का सामना भी करना पड़ सकता है।

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