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शिमला: रोहड़ू के कुटारा गांव में एक बीज से उगाए पौधे पर 200 से अधिक सूरजमुखी फूल, बागवानी विभाग करेगा अध्ययन

Mon, 24 Aug 2026 09:59 AM IST
Ankesh Dogra अनिल पंवार, शिमला।
अनिल पंवार, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 24 Aug 2026 09:59 AM IST
सार

शिमला के रोहड़ू क्षेत्र के कुटारा गांव में सूरजमुखी के एक पौधे पर 200 से अधिक फूल खिलने का मामला सामने आया है। जल शक्ति विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता विजय मच्छान के घर के आंगन में उगे इस पौधे ने बागवानी विभाग का ध्यान खींचा है। विभाग इसकी खासियत की वैज्ञानिक जांच करेगा। परीक्षणों में यह गुण स्थायी साबित हुआ तो सूरजमुखी को कट फ्लावर और सजावटी फूल के रूप में किसानों की आय बढ़ाने के विकल्प के तौर पर विकसित किया जा सकता है।

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200 फूलों वाले सूरजमुखी के पौधे के साथ विजय मच्छान। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के दौर में शिमला से फसल विविधीकरण की नई और सुखद उम्मीद जगी है। रोहड़ू के कुटारा गांव में सूरजमुखी के एक पौधे में 200 से अधिक फूल खिले हैं। इस अजूबे ने बागवानी विभाग के विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। विभाग ने इस पौधे का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन करने का निर्णय लिया है। अध्ययन में इस पौधे की खासियत साबित होती है, तो यह प्रदेश के किसानों-बागवानों के लिए आय का एक नया साधन बन सकता है।
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जल शक्ति विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता और कुटारा गांव निवासी विजय मच्छान ने एक रिश्तेदार से सूरजमुखी का बीज लिया था। मई की शुरुआत में उनके केयरटेकर श्याम सिंह ने इसे घर के आंगन में लगाया। जब पौधा बड़ा हुआ, तो कुछ ही दिनों में यह फूलों से भर गया। इसमें करीब 200 फूल खिल चुके हैं, जबकि कुछ अन्य अभी तैयार हो रहे हैं। एक पौधे में इतने सारे फूल देखकर गांव के लोग भी हैरान रह गए। पौधे की जानकारी मिलने के बाद बागवानी विभाग ने इसका संज्ञान लिया।
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विभाग ने विजय मच्छान से पौधे का वीडियो और अन्य विवरण उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है। बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने इसे वैज्ञानिक अध्ययन की शुरुआत बताते हुए कहा कि यदि आने वाले वर्षों में परीक्षणों में इसकी पुष्टि होती है, तो यह सूरजमुखी आधारित फसल विविधीकरण की दिशा में एक बड़ी संभावना बन सकता है। 
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विभाग ने विजय मच्छान से पौधे के बीज सुरक्षित रखने और आगामी वर्ष उसी से दोबारा पौधे तैयार करने का आग्रह किया है। अगले तीन साल इसकी अगली पीढ़ियों के आनुवंशिक गुणों, फूलों की गुणवत्ता, रोग सहनशीलता, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसके प्रदर्शन का अध्ययन होगा। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए विभिन्न स्थानों पर बहु-स्थान परीक्षण भी किए जाएंगे। बता दें कि सूरजमुखी के पौधे पर अकसर एक ही फूल लगता है।

आय का बन सकता है बड़ा साधन
बागवानी विभाग के विशेषज्ञ कुशल सिंह मेहता ने बताया कि सूरजमुखी को केवल तिलहन फसल के रूप में नहीं, बल्कि कट फ्लावर और सजावटी फूल के रूप में भी आय का साधन बनाया जा सकता है। यदि अधिक फूल देने वाले पौधे की यह विशेषता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होती है तो कट फ्लावर, बुके, फ्लोरिस्ट, होटल, कार्यालयों और विभिन्न आयोजनों के लिए फूलों की स्थानीय मूल्य शृंखला विकसित की जा सकती है। यदि 50 रुपये प्रति फूल भी दाम मिलते हैं तो इस तरह के एक ही पौधे से किसानों को करीब 10 हजार रुपये तक की कमाई हो सकती है। हालांकि वास्तविक आय फूलों की गुणवत्ता, बाजार भाव, उत्पादन लागत, मांग और विपणन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
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