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बनना चाहता था वकील बनकर रह गया टाइपिस्ट
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 25 Mar 2014 07:11 PM IST
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भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित हिम रंग महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के गौथिक हॉल में टाइपिस्ट का मंचन किया गया।
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मुख्यातिथि के रूप में भाषा एवं संस्कृति विभाग कि निदेशक अरूण कुमार शर्मा ने शिरकत की जिसके बाद कार्यक्रम की शुरूआत हुई।
केदार ठाकुर द्वारा निर्देशित नाटक सोहनलाल और तनुप्रिया पर आधारित है जो एक फर्म में टाइपिस्ट और सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत हैं।
सोहनलाल जो कानून की पढ़ाई कर वकील बनना चाहता था पर परिस्थितियों के चलते जीवन भर के लिए एक टाइपिस्ट बनकर रह जाता है।
नायक पूरे नाटक में अपने सपनों और निराशा के बवंडर में फंसा रहता है।
नाटक के पात्रों और निर्देशक ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि दिन प्रतिदिन दोहराया जाने वाला क्रम पूरे जीवन काल में एकरस जीवन जीने की आदत डाल देता है और यही आदतें इंसान के पूरे जीवनकाल में एक सुरक्षा का भाव उत्पन्न कर देती हैं।
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नाटक मंच पर जीवन की एकरसता, नाउम्मीदी, आदर्शवाद, अपराधबोध और डर के अंधेरे भाव को बड़ी सुंदरता से पेश किया गया।
सेट डिजाइन तनुप्रिया और धमेंद्र ने की। तनुप्रिया भास्कर और सोहन कुमार शर्मा ने मंच पर मुख्य किरदारों की भूमिका निभाई।