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Shimla News: भवनों में दरारें देख केंद्रीय टीम ने लगाई फटकार, पूछा-कहां से की है इंजीनियरिंग
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सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने मंगलवार दोपहर शांति विहार वार्ड में फोरलेन टनल से दरके भवनों का किया निरीक्षण
मौके पर ही एनएनएआई के इंजीनियर किए तलब, पूछा-कैसे कर रहे निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में फोरलेन टनल के निर्माण के चलते शांति विहार क्षेत्र में भवनों को आई दरारों का सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की टीम ने मंगलवार दोपहर मौके पर जाकर जायजा लिया। कमेटी के चेयरमैन चंद्र प्रकाश गोयल की अगुवाई में टीम दोपहर करीब 12:30 बजे शांति विहार पहुंची।
इस दौरान यहां स्थानीय लोग भी जुट गए। लोगों ने कहा कि टनल निर्माण के चलते उनके बहुमंजिला मकान खतरे की जद में आ गए हैं। पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि अब तक दस से ज्यादा मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। यह सब इस क्षेत्र के नीचे बन रही फोरलेन टनल के कारण हुआ है। यदि निर्माण आगे बढ़ा तो 300 से ज्यादा मकान खतरे में आ जाएंगे। आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को इस निर्माण के बारे में बताया तक नहीं। स्थानीय लोग टीम को पेट्रोल पंप के साथ लगते दो भवनों में भी ले गए जिनकी दीवारें दरक चुकी हैं। भवनों में पड़ी दरारें देख केंद्रीय टीम भी हैरान रह गई। टीम ने इन भवनों की फोटो भी ली। चेयरमैन चंद्र प्रकाश गोयल ने मौके पर मौजूद साइट इंजीनियर से पूछा कि आखिर यह कैसा निर्माण हो रहा है। इंजीनियर से पूछा कि कहां से ऐसी इंजीनियरिंग की है। फटकार लगाई कि ऐसे निर्माण से रिहायशी इलाकों को खतरा पैदा हो गया है। लोगों ने कहा कि उन्हें अब ऐसे मकान में रहने से डर लगता है। कहा कि एनएचएआई ने पुराना सर्वे बदल दिया। यदि पहले किए सर्वे से निर्माण करते तो टनल बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। मौके पर मौजूद एनएचएआई के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
लोगों ने कहा कि उनकी जीवन भर की कमाई खतरे में है। इसे बचाया जाए। टीम के सदस्यों से राहत की मांग की। कमेटी ने कहा कि इस दौरे में जो भी निरीक्षण किया गया है, उसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस दौरान एडीसी ज्ञान सागर नेगी समेत अन्य लोग भी मौके पर मौजूद रहे।
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प्रभावितों ने कमेटी के सामने उठाई मांग
केंद्रीय टीम ने मंगलवार को रामपुर जाना था लेकिन स्थानीय लोगों के आग्रह पर टीम शांति विहार पहुंची। केंद्रीय टीम से प्रभावित परिवारों ने भी मुलाकात की और अपना दर्द सुनाया। कहा कि वे बेघर हो गए हैं। पहले कई लोगों को किराये पर आवास दिए थे, अब खुद किरायेदार बन गए हैं। पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि लोग परेशान हैं। जिनका नुकसान हुआ है, उन्हें समय पर मुआवजा तक नहीं दिया जा रहा है। डीसी की रिपोर्ट के बाद भी राहत नहीं दी गई है।
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मौके पर ही एनएनएआई के इंजीनियर किए तलब, पूछा-कैसे कर रहे निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में फोरलेन टनल के निर्माण के चलते शांति विहार क्षेत्र में भवनों को आई दरारों का सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की टीम ने मंगलवार दोपहर मौके पर जाकर जायजा लिया। कमेटी के चेयरमैन चंद्र प्रकाश गोयल की अगुवाई में टीम दोपहर करीब 12:30 बजे शांति विहार पहुंची।
इस दौरान यहां स्थानीय लोग भी जुट गए। लोगों ने कहा कि टनल निर्माण के चलते उनके बहुमंजिला मकान खतरे की जद में आ गए हैं। पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि अब तक दस से ज्यादा मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। यह सब इस क्षेत्र के नीचे बन रही फोरलेन टनल के कारण हुआ है। यदि निर्माण आगे बढ़ा तो 300 से ज्यादा मकान खतरे में आ जाएंगे। आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को इस निर्माण के बारे में बताया तक नहीं। स्थानीय लोग टीम को पेट्रोल पंप के साथ लगते दो भवनों में भी ले गए जिनकी दीवारें दरक चुकी हैं। भवनों में पड़ी दरारें देख केंद्रीय टीम भी हैरान रह गई। टीम ने इन भवनों की फोटो भी ली। चेयरमैन चंद्र प्रकाश गोयल ने मौके पर मौजूद साइट इंजीनियर से पूछा कि आखिर यह कैसा निर्माण हो रहा है। इंजीनियर से पूछा कि कहां से ऐसी इंजीनियरिंग की है। फटकार लगाई कि ऐसे निर्माण से रिहायशी इलाकों को खतरा पैदा हो गया है। लोगों ने कहा कि उन्हें अब ऐसे मकान में रहने से डर लगता है। कहा कि एनएचएआई ने पुराना सर्वे बदल दिया। यदि पहले किए सर्वे से निर्माण करते तो टनल बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। मौके पर मौजूद एनएचएआई के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
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लोगों ने कहा कि उनकी जीवन भर की कमाई खतरे में है। इसे बचाया जाए। टीम के सदस्यों से राहत की मांग की। कमेटी ने कहा कि इस दौरे में जो भी निरीक्षण किया गया है, उसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस दौरान एडीसी ज्ञान सागर नेगी समेत अन्य लोग भी मौके पर मौजूद रहे।
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प्रभावितों ने कमेटी के सामने उठाई मांग
केंद्रीय टीम ने मंगलवार को रामपुर जाना था लेकिन स्थानीय लोगों के आग्रह पर टीम शांति विहार पहुंची। केंद्रीय टीम से प्रभावित परिवारों ने भी मुलाकात की और अपना दर्द सुनाया। कहा कि वे बेघर हो गए हैं। पहले कई लोगों को किराये पर आवास दिए थे, अब खुद किरायेदार बन गए हैं। पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि लोग परेशान हैं। जिनका नुकसान हुआ है, उन्हें समय पर मुआवजा तक नहीं दिया जा रहा है। डीसी की रिपोर्ट के बाद भी राहत नहीं दी गई है।