{"_id":"62756660ec564d787500c9bc","slug":"virel-fiver-in-child-shimla-news-sml4079846158","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाल रोग वार्ड फुल, एक बेड पर दो-दो बच्चे किए दाखिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाल रोग वार्ड फुल, एक बेड पर दो-दो बच्चे किए दाखिल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्चों में अचानक बढ़े वायरल फीवर से आईजीएमसी में बिगड़ने लगे हालात
अधिकतर दाखिल बच्चे खांसी और बुखार से पीड़ित
अभिभावकों ने जताई संक्रमण बढ़ने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) का बाल रोग वार्ड मरीजों से फुल हो गया है। अब एक बिस्तर पर डॉक्टरों को दो-दो बच्चों को दाखिल करना पड़ रहा है। अधिकांश दाखिल बच्चे खांसी, बुखार और छाती होने की समस्या से पीड़ित हैं।
आईजीएमसी के बाल रोग वार्ड में 100 के करीब बिस्तर हैं। लेकिन आजकल 120 से अधिक बच्चे इस वार्ड में दाखिल हैं। ओपीडी के अलावा रात के समय चार डॉक्टर हर समय ड्यूटी पर रहते हैं। आईजीएमसी में रोजाना 35 सौ के करीब ओपीडी होती है। बाल रोग ओपीडी में आजकल बच्चों की काफी भीड़ है। अधिकांश बच्चे पांच से दस साल तक की आयु के बीच के हैं। अधिकतर वायरल फीवर से पीड़ित हैं। संक्रमित बच्चों के अधिक संख्या में आने से बिस्तर पर दो-दो बच्चों को दाखिल करने से अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है कि इससे संक्रमण और बढ़ने के आसार हैं।
सिरमौर की किरण ने बताया कि उनके बच्चे को निमोनिया हुआ है। लेकिन एक बिस्तर पर दो-दो बच्चों के होने से परेशानी बढ़ी है। खलीनी की गीता ने बताया कि उनके पोते को पीलिया हुआ है। छोटे बच्चे के साथ एक बड़े बच्चे को भी बिस्तर दे दिया है। दूसरे बच्चों को जुकाम और बुखार है जिससेे उनके पोते के भी संक्रमित होने का खतरा है।
विज्ञापन
3 से 8 साल के बच्चे अधिक
आईजीएमसी के बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि तीन से आठ साल के बच्चे अधिक संख्या में उपचार के लिए अस्पताल आ रहे हैं। इन बच्चों में खांसी, जुकाम तथा हाई फीवर की समस्या है। यह सभी स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। संक्रमण एक बच्चे से दूसरे में फैलता है। 7 से 8 दिन में यह वायरल खुद ठीक हो जाता है।
सीटी स्कैन मशीन खराब, अभिभावक परेशान
आईजीएमसी में सिटी स्कैन मशीन काफी समय से खराब है। आपात स्थिति में आए मरीजों के अलावा छोटे बच्चों को टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है लेकिन टेस्ट नहीं हो रहे। रामपुर के रमेश ने बताया उनकी बेटी को डॉक्टर ने सीटी स्कैन करने को कहा है। चार दिन से परेशान हूं। अब निजी लैब में महंगी दरों पर टेस्ट करवाने होंगे। आईजीएमसी में सिटी स्कैन 1000 से 2500 रुपये में होता है लेकिन निजी लैब में यह टेस्ट 3,000 से 4,000 रुपये में होते हैं।
विज्ञापन
अधिकतर दाखिल बच्चे खांसी और बुखार से पीड़ित
अभिभावकों ने जताई संक्रमण बढ़ने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) का बाल रोग वार्ड मरीजों से फुल हो गया है। अब एक बिस्तर पर डॉक्टरों को दो-दो बच्चों को दाखिल करना पड़ रहा है। अधिकांश दाखिल बच्चे खांसी, बुखार और छाती होने की समस्या से पीड़ित हैं।
आईजीएमसी के बाल रोग वार्ड में 100 के करीब बिस्तर हैं। लेकिन आजकल 120 से अधिक बच्चे इस वार्ड में दाखिल हैं। ओपीडी के अलावा रात के समय चार डॉक्टर हर समय ड्यूटी पर रहते हैं। आईजीएमसी में रोजाना 35 सौ के करीब ओपीडी होती है। बाल रोग ओपीडी में आजकल बच्चों की काफी भीड़ है। अधिकांश बच्चे पांच से दस साल तक की आयु के बीच के हैं। अधिकतर वायरल फीवर से पीड़ित हैं। संक्रमित बच्चों के अधिक संख्या में आने से बिस्तर पर दो-दो बच्चों को दाखिल करने से अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है कि इससे संक्रमण और बढ़ने के आसार हैं।
विज्ञापन
सिरमौर की किरण ने बताया कि उनके बच्चे को निमोनिया हुआ है। लेकिन एक बिस्तर पर दो-दो बच्चों के होने से परेशानी बढ़ी है। खलीनी की गीता ने बताया कि उनके पोते को पीलिया हुआ है। छोटे बच्चे के साथ एक बड़े बच्चे को भी बिस्तर दे दिया है। दूसरे बच्चों को जुकाम और बुखार है जिससेे उनके पोते के भी संक्रमित होने का खतरा है।
विज्ञापन
3 से 8 साल के बच्चे अधिक
आईजीएमसी के बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि तीन से आठ साल के बच्चे अधिक संख्या में उपचार के लिए अस्पताल आ रहे हैं। इन बच्चों में खांसी, जुकाम तथा हाई फीवर की समस्या है। यह सभी स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। संक्रमण एक बच्चे से दूसरे में फैलता है। 7 से 8 दिन में यह वायरल खुद ठीक हो जाता है।
सीटी स्कैन मशीन खराब, अभिभावक परेशान
आईजीएमसी में सिटी स्कैन मशीन काफी समय से खराब है। आपात स्थिति में आए मरीजों के अलावा छोटे बच्चों को टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है लेकिन टेस्ट नहीं हो रहे। रामपुर के रमेश ने बताया उनकी बेटी को डॉक्टर ने सीटी स्कैन करने को कहा है। चार दिन से परेशान हूं। अब निजी लैब में महंगी दरों पर टेस्ट करवाने होंगे। आईजीएमसी में सिटी स्कैन 1000 से 2500 रुपये में होता है लेकिन निजी लैब में यह टेस्ट 3,000 से 4,000 रुपये में होते हैं।