विरोधियों पर फिर भारी पडे़ वीरभद्र, इन दो नेताओं की आसान नहीं जंग
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पिछले दो दिनों में कांग्रेस की सियासत में आए उफान के बीच वीरभद्र तमाम विरोधियों पर भारी पड़े हैं। पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच वीरभद्र प्रदेश कांग्रेस में अपने मनमाफिक बदलाव की मुहिम को तेज कर सकते हैं, क्योंकि सामने लोकसभा चुनाव हैं। इधर नई प्रभारी रजनी पाटिल के हिमाचल आने से कांग्रेस के खामोश पड़े खेमे उल्टे मुखर हो गए हैं।
गुटबाजी घटने के बजाय आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। नई प्रभारी के स्वागत में सुक्खू ने कांग्रेस की बैठक बुलाई तो इसमें न तो वीरभद्र और न ही उनके करीबी कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ही पहुंचे। दूसरे दिन रजनी पाटिल को वीरभद्र से मिलने उनके निजी निवास हॉली लॉज जाना पड़ा।
अपने घर पर भी वीरभद्र ने रजनी पाटिल से बतौर प्रभारी पहली ही मुलाकात में कांग्रेस संगठन में फेरबदल की बात कर डाली। उन्हें वीरभद्र को आश्वस्त करना पड़ा कि वह दिल्ली जाकर उनका संदेश हाईकमान तक पहुंचाएंगी।
इसी दिन पत्रकार वार्ता में भी पाटिल ने खुद प्रदेश कांग्र्रेस में गुटबाजी की बात स्वीकार करते हुए कहना पड़ा कि गुट हर पार्टी में होते हैं, मगर इनसे नुकसान नहीं होना चाहिए।
सुक्खू और कौल सिंह के लिए आसान नहीं जंग
अब कांगड़ा में वीरभद्र गुट के नेताओं ने प्रस्तावित सम्मेलन में विरोधी खेमे के नेताओं को न बुलाकर ये साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में उनकी यह मुहिम और तेजी पकड़ सकती है। सारी स्थिति भांपते हुए सुक्खू शिमला से रजनी पाटिल के लौटने से पहले ही दिल्ली चले गए हैं।
सुक्खू हाईकमान से लोकसभा चुनाव से पहले भी उसी तरह का अभयदान मांग सकते हैं, जैसा कि उन्हें विधानसभा चुनाव से पहले मिला था। पर बुरी तरह से विधानसभा चुनाव में हारी कांग्रेस के बारे में हाईकमान की ताजा राय रजनी पाटिल की रिपोर्ट के बाद आने वाले दिनों में ही साफ होगी। इसमें भी वीरभद्र खेमा अपना पूरा दखल देने को प्रयास करेगा।
साथ-साथ चल रहे सुक्खू और कौल सिंह की वीरभद्र गुट के खिलाफ जंग आसान नहीं है। छात्र राजनीति के रास्ते सुक्खू को राज्य की राजनीति में लाने वाले पंडित सुखराम और विद्या स्टोक्स कांग्रेस की सियासत से लगभग किनारा कर चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह बेशक सुक्खू के साथ जरूर हैं, मगर उनकी पार्टी में पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री से अधिक की हैसियत नहीं है।